बॉलीवुड की ‘बेबो’ का बड़ा खुलासा: पढ़ाई अधूरी छोड़ने का आज भी है मलाल

हिंदी सिनेमा की सबसे सफल और लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शुमार करीना कपूर खान (Kareena Kapoor Khan) ने अपने फिल्मी करियर में अपार शोहरत और कई प्रतिष्ठित पुरस्कार हासिल किए हैं। दो दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं, लेकिन इस भारी सफलता के बावजूद उनकी जिंदगी में एक ऐसी कमी रह गई है, जिसे वह आज भी नहीं भूल पाई हैं। हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान करीना कपूर का दर्द खुलकर सामने आया, जहां उन्होंने स्वीकार किया कि फिल्मों में करियर बनाने की जल्दबाजी में 11वीं कक्षा के बाद औपचारिक शिक्षा छोड़ देने का पछतावा उन्हें आज भी सताता है।

पॉडकास्टर हनुमान दास के साथ एक विशेष बातचीत के दौरान करीना कपूर ने अपने शुरुआती जीवन और पढ़ाई के दिनों को याद किया। उन्होंने बेहद ईमानदारी से अपनी बात रखते हुए कहा कि भले ही उनके पास अच्छी शिक्षा पूरी करने के तमाम अवसर मौजूद थे, लेकिन कम उम्र में अभिनय के प्रति उनका जुनून इतना हावी हो गया कि उन्होंने 11वीं क्लास के बाद स्कूल को अलविदा कह दिया। करीना ने कहा कि उन्हें पता है कि बहुत से लोग इस बात का मजाक उड़ा सकते हैं या अपनी राय रख सकते हैं, लेकिन उस समय वह सिर्फ खुद को एक अभिनेत्री के तौर पर साबित करना चाहती थीं और अपने दिल की आवाज पर चल रही थीं। हालांकि, उम्र और अनुभव के इस पड़ाव पर उन्हें गहराई से एहसास होता है कि औपचारिक शिक्षा का जीवन में क्या महत्व होता है।

अपने इस व्यक्तिगत पछतावे का असर करीना कपूर की पेरेंटिंग स्टाइल पर भी साफ तौर पर दिखाई देता है। सैफ अली खान और करीना कपूर के दोनों बेटे तैमूर अली खान और जहांगीर अली खान (जेह) अक्सर सोशल मीडिया और पैपराजी के बीच छाए रहते हैं, लेकिन करीना ने उनके भविष्य को लेकर एक सख्त फैसला ले रखा है। करीना का कहना है कि उन्होंने अपने दोनों बेटों को साफ निर्देश दिया है कि वे जो भी बनना चाहते हैं बनें, लेकिन उन्हें अपनी पढ़ाई हर हाल में पहले पूरी करनी होगी। चाहे वे खेल जगत में जाएं या सिनेमा में, उच्च शिक्षा की डिग्री हासिल करने के बाद ही वे अपने जुनून को पेशेवर रूप से अपना सकेंगे।

इंटरव्यू के दौरान जब करीना से उनके बड़े बेटे तैमूर के भविष्य के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वह खुद को एक ‘फुटबॉल और क्रिकेट मॉम’ मानती हैं। तैमूर खेलों में गहरी रुचि रखते हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए क्रिकेट या फुटबॉल खेलना चाहते हैं। करीना ने स्पष्ट किया कि कपूर और पटौदी खानदान का हिस्सा होने का मतलब यह कतई नहीं है कि उनके बच्चों को जबरन एक्टिंग की दुनिया में ही आना पड़ेगा। वह अपने बच्चों के सपनों का पूरा समर्थन करेंगी, बशर्ते उनकी बुनियादी और उच्च शिक्षा में कोई समझौता न हो।

करीना कपूर वर्ष 2014 से यूनिसेफ इंडिया (UNICEF India) के साथ एक सेलिब्रिटी एडवोकेट और नेशनल एंबेसडर के रूप में जुड़ी हुई हैं। वह देश भर में लड़कियों की बुनियादी शिक्षा, जेंडर इक्वालिटी और बच्चों के सीखने के अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाती रही हैं। करीना ने भावुक होते हुए खुलासा किया कि जब यूनिसेफ ने उनसे बालिकाओं की शिक्षा के अभियान से जुड़ने का आग्रह किया था, तो यह मुद्दा उनके दिल के बेहद करीब इसलिए लगा क्योंकि वह खुद अपनी पढ़ाई बीच में छूट जाने का दर्द अच्छी तरह समझती थीं। वह चाहती हैं कि देश की हर बच्ची को अपनी पढ़ाई पूरी करने का पूरा अवसर और अधिकार मिले।

करीना कपूर ने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा मुंबई के प्रतिष्ठित जमनाबाई नरसी स्कूल और उसके बाद देहरादून के प्रसिद्ध वेल्हम गर्ल्स स्कूल से पूरी की थी। उन्होंने बाद में मुंबई के मिठीबाई कॉलेज में कुछ समय पढ़ाई की और हार्वर्ड समर स्कूल से माइक्रो कंप्यूटर का एक अल्पकालिक कोर्स भी किया। इसके बाद उन्होंने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज में दाखिला भी लिया था, लेकिन वर्ष 2000 में जे.पी. दत्ता की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रिफ्यूजी’ से महज 19 साल की उम्र में डेब्यू करने के चलते उनकी औपचारिक उच्च शिक्षा पूरी तरह अधूरी रह गई।

फिल्मी मोर्चे पर करीना कपूर आने वाले दिनों में निर्देशक मेघना गुलजार की आगामी बहुचर्चित क्राइम-थ्रिलर फिल्म ‘दायरा’ (Daayra) में नजर आने वाली हैं। सच्ची घटनाओं पर आधारित इस फिल्म में करीना एक पुलिस अधिकारी (DCP अजूनी कोहली) की बेहद गंभीर और दमदार भूमिका निभा रही हैं, जिसमें उनके साथ साउथ सुपरस्टार पृथ्वीराज सुकुमारन भी मुख्य भूमिका में दिखाई देंगे।