
बॉलीवुड में अपने संजीदा और महिला-केंद्रित किरदारों के लिए मशहूर अभिनेत्री तापसी पन्नू (Taapsee Pannu) एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज को लेकर सोशल मीडिया और फिल्मी गलियारों में चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। अपनी नई प्रोजेक्ट ‘गांधारी’ (Gandhari) के प्रमोशन के सिलसिले में दिए गए एक हालिया इंटरव्यू में तापसी ने आज के मुख्यधारा सिनेमा और बॉक्स ऑफिस पर हावी ट्रेंड्स को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि मौजूदा समय में जिस तरह की फिल्में थिएटरों में चल रही हैं, वैसी फिल्में करने के बजाय वह एक्टिंग से संन्यास (Retirement) लेना अधिक पसंद करेंगी। तापसी का यह बयान सामने आते ही इंटरनेट पर वायरल हो गया और इसने एक नई बहस छेड़ दी है।
फिल्म समीक्षक सुचीन मेहरोत्रा के साथ बातचीत के दौरान तापसी से पूछा गया कि करीब एक दशक पहले (2015 के आसपास) जिस तरह की अलग-अलग कहानियों वाली फिल्में बनती थीं, क्या आज सिनेमा का पूरा परिदृश्य बदल चुका है? इस पर तापसी ने अतीत को याद करते हुए कहा कि वह खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हैं कि उनका करियर उस दौर में शुरू हुआ जब बॉलीवुड में विविध विषयों, सशक्त महिला किरदारों और अलग जॉनर की फिल्मों के लिए पर्याप्त जगह थी। उन्होंने कहा कि यदि वह आज के समय में इंडस्ट्री में कदम रखतीं, जहां केवल एक ही तरह का फॉर्मूला और शॉक वैल्यू हावी है, तो शायद उनके जैसी अभिनेत्री के लिए अपनी जगह बना पाना असंभव होता।
तापसी ने इंटरव्यू में बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाला किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों के दौरान रिलीज हुई कुछ बड़ी फिल्मों को देखने के बाद वह अपने परिवार के साथ बैठी थीं और गंभीर बातचीत कर रही थीं। उन्होंने अपने परिजनों से मजाक और गंभीरता के बीच कहा— “कहीं मेरे रिटायर होने का समय तो नहीं आ गया है?” तापसी के अनुसार, वह यह अच्छी तरह समझती हैं कि हर तरह के सिनेमा का अपना दर्शक वर्ग होता है और लोग एक्शन व हिंसा से भरी फिल्में देखना पसंद करते हैं, लेकिन एक कलाकार के तौर पर वह बिना सोचे-समझे सिर्फ ट्रेंड और कमर्शियल सफलता के पीछे नहीं भाग सकतीं। उन्होंने कहा कि वह अपने काम से प्यार करती हैं, लेकिन यह प्यार इतना अंधा नहीं है कि वह अपनी पसंद के विपरीत जाकर ऐसे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बन जाएं।
तापसी का यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर यूजर्स ने इसे हालिया रिलीज पैन-इंडिया फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ (Toxic) से जोड़ना शुरू कर दिया। गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी इस फिल्म में कन्नड़ सुपरस्टार यश के साथ कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया मुख्य भूमिकाओं में हैं। रिलीज के बाद से ही फिल्म में दिखाए गए अत्यधिक हिंसक दृश्यों और महिला किरदारों के चित्रण को लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं और आलोचनाएं देखने को मिल रही थीं। ऐसे में यूजर्स ने दावा किया कि तापसी का निशाना सीधे तौर पर ‘टॉक्सिक’ और उसमें काम करने वाली अभिनेत्रियों पर था।
हालांकि सोशल मीडिया पर चल रही तमाम अटकलों के बीच असल तथ्य यह है कि तापसी पन्नू ने अपने पूरे इंटरव्यू में न तो फिल्म ‘टॉक्सिक’ का नाम लिया और न ही कियारा आडवाणी या किसी अन्य सह-कलाकार का कोई सीधा जिक्र किया। उनका बयान किसी एक विशेष प्रोजेक्ट के खिलाफ व्यक्तिगत हमला होने के बजाय सिनेमा के बदलते रुझान, स्क्रिप्ट के चयन और एक कलाकार के रूप में अपनी निजी प्राथमिकताओं को लेकर था। फिर भी, चूंकि ‘टॉक्सिक’ हालिया दिनों की सबसे चर्चित और विवादास्पद रिलीज रही है, इसलिए नेटिज़न्स ने तापसी की टिप्पणी को इस फिल्म की आलोचना के तौर पर ही देखा।
तापसी ने आगे बात करते हुए अपनी फिल्मोग्राफी को सबसे अहम धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि दर्शक और सिनेमा का दौर हर दशक में बदल जाता है। आज जिस तरह की फिल्मों का बोलबाला है, जरूरी नहीं कि 10 साल बाद भी लोग उसी तरह का सिनेमा देखें। तापसी ने स्पष्ट किया, “समय बदलेगा और शैलियां भी बदल जाएंगी, लेकिन मेरी फिल्मोग्राफी हमेशा वैसी ही दर्ज रहेगी। मैं चाहती हूं कि आने वाले सालों में जब कोई मेरे काम को देखे या मैं खुद अपने करियर पर नजर डालूं, तो मुझे अपने फैसलों पर किसी तरह की शर्मिंदगी महसूस न हो।” यही कारण है कि वह बॉक्स ऑफिस के तात्कालिक दबाव में आकर अपने उसूलों से समझौता करने के पक्ष में नहीं हैं।
तापसी के इस बयान के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है। जहां एक वर्ग तापसी के इस स्टैंड की तारीफ कर रहा है कि वह आज भी कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा और मजबूत महिला किरदारों को प्राथमिकता दे रही हैं, वहीं कई यूजर्स ने उन्हें आड़े हाथों लिया। कुछ आलोचकों ने तापसी की पिछली फिल्मों जैसे ‘जुड़वा 2’ और ओटीटी फिल्म ‘हसीन दिलरुबा’ की याद दिलाते हुए उन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। कई फैंस का कहना था कि हर जॉनर की अपनी जरूरत होती है और कमर्शियल फिल्मों में मुख्यधारा की अभिनेत्रियों के काम को नीचा दिखाना अनुचित है।
तापसी पन्नू ने अपने करियर में ‘पिंक’, ‘नाम शबाना’, ‘मुल्क’, ‘मनमर्जियां’, ‘बदला’, ‘थप्पड़’ और ‘रश्मि रॉकेट’ जैसी फिल्मों से इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। अब वह अपनी आगामी फिल्म ‘गांधारी’ के साथ आ रही हैं, जिसका निर्देशन देवाशीष मखीजा ने किया है और इसकी पटकथा कनिका ढिल्लों ने लिखी है। इस फिल्म में वह एक दृष्टिबाधित मां की भूमिका निभा रही हैं, जो अपने बच्चे के लिए विपरीत परिस्थितियों से लड़ती है। तापसी का यह ताजा बयान एक बार फिर साबित करता है कि वह किसी भी ट्रेंड का अंधानुकरण करने के बजाय हमेशा अपनी शर्तों पर काम करना पसंद करती हैं।
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