देश के 4 सबसे बड़े मंदिरों के पास कितना पैसा, सोना और जमीन? जगन्नाथ पुरी से लेकर तिरुपति और राम मंदिर तक, जानें अरबों-खरबों की संपत्ति का पूरा ब्योरा

भारत में प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर केवल करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और अध्यात्म के केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे देश की सामाजिक और आर्थिक व्यवस्था के भी विशाल स्तंभ हैं। हाल ही में ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) द्वारा मंदिर की कुल बैंक जमा राशि, रत्न भंडार और जमीन का आधिकारिक ब्योरा सार्वजनिक किए जाने के बाद यह विषय एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में आ गया है।

भक्तों द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोने, चांदी, बहुमूल्य हीरों, नकद दान और पीढ़ियों से दान की गई जमीनों के दम पर इन मंदिरों का खजाना कई बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों से भी अधिक समृद्ध है। आइए जानते हैं पुरी के जगन्नाथ मंदिर से लेकर आंध्र प्रदेश के तिरुपति बालाजी, अयोध्या के भव्य राम मंदिर और केरल के गुरुवायूर मंदिर के पास कुल कितना बैंक बैलेंस, सोना और जमीन मौजूद है।

ओडिशा के पुरी स्थित महाप्रभु जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने हाल ही में अपनी वित्तीय स्थिति की विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। इसके अनुसार 31 अगस्त 2026 तक मंदिर के पास कुल संपत्ति का विवरण इस प्रकार है:

  • बैंक में जमा नकदी: मंदिर के विभिन्न बैंक खातों में कुल 1,911.80 करोड़ रुपये (लगभग 1,912 करोड़ रुपये) जमा हैं।

  • फिक्स्ड डिपॉजिट (FD): इस कुल राशि में से 1,811.10 करोड़ रुपये विभिन्न सरकारी व राष्ट्रीयकृत बैंकों में तीन अलग-अलग योजनाओं के तहत एफडी के रूप में सुरक्षित हैं। इसमें 500 करोड़ रुपये ओडिशा सरकार द्वारा दी गई स्थायी अक्षय निधि (Corpus Fund) है। शेष लगभग 100.71 करोड़ रुपये बचत और चालू खातों में हैं।

  • जमीन का दायरा: मंदिर के नाम पर देश भर में कुल 60,821 एकड़ जमीन दर्ज है। इसमें से 60,426 एकड़ जमीन अकेले ओडिशा के 24 जिलों में फैली है, जबकि करीब 395 एकड़ जमीन पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार समेत 6 अन्य राज्यों में स्थित है।

  • सोना और रत्न भंडार: मंदिर के ऐतिहासिक ‘रत्न भंडार’ (Ratna Bhandar) में सदियों पुराने सोने के मुकुट, हार, हीरे, माणिक और आभूषण सुरक्षित हैं। 48 साल के लंबे अंतराल के बाद रत्न भंडार को खोलकर अब इसकी विस्तृत डिजिटल और भौतिक इन्वेंट्री तैयार की जा रही है।

आंध्र प्रदेश की शेषाचलम पहाड़ियों पर स्थित भगवान वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) का मंदिर देश का सबसे धनी और सर्वाधिक आय अर्जित करने वाला धर्मस्थल माना जाता है। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) द्वारा जारी आधिकारिक व्हाइट पेपर और वित्तीय रिपोर्टों के अनुसार:

  • कुल अनुमानित संपत्ति: टीटीडी की कुल घोषित संपत्तियों का मूल्य 2.5 लाख करोड़ रुपये (Rs 2.5 Lakh Crore) से भी अधिक आंका गया है।

  • बैंकों में एफडी और नकदी: टीटीडी के पास विभिन्न राष्ट्रीयकृत और शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों में 16,000 करोड़ रुपये से अधिक की फिक्स्ड डिपॉजिट और नकदी जमा है।

  • सोने का विशाल भंडार: तिरुपति मंदिर के पास बैंकों की गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) के तहत 11.3 टन (लगभग 11,329 किलोग्राम) से अधिक शुद्ध सोना जमा है, जिस पर मंदिर को हर साल करोड़ों रुपये का ब्याज मिलता है। इसके अलावा भगवान के विग्रह पर सजने वाले प्राचीन और बेशकीमती हीरों-जवाहरात का कोई आधिकारिक बाजार मूल्य तय नहीं किया गया है।

  • जमीन और अचल संपत्ति: टीटीडी के पास देश भर में 960 से अधिक अचल संपत्तियां और 7,123 एकड़ से ज्यादा जमीन दर्ज है। संस्थान का सालाना परिचालन बजट ही 5,456 करोड़ रुपये से अधिक का रहता है।

22 जनवरी 2024 को भव्य प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में रामलला के दरबार में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा जारी वित्तीय वर्ष 2025-26 के ऑडिट ब्योरे के अनुसार:

  • उपलब्ध कुल बैंक बैलेंस: 31 मार्च 2026 की स्थिति के अनुसार ट्रस्ट के पास कुल 1,882 करोड़ रुपये की राशि विभिन्न बैंक खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट्स में उपलब्ध थी।

  • वार्षिक आय और खर्च: वित्त वर्ष 2025-26 में ट्रस्ट को दान, कूपन और हुंडी के जरिए लगभग 237 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई, जबकि नियमित प्रशासनिक कार्यों पर 91 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके अतिरिक्त मुख्य मंदिर परिसर, परकोटा और यात्री सुविधाओं के निर्माण पर 425 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure) किया गया।

  • सोना और चांदी का चढ़ावा: राम मंदिर ट्रस्ट को देश भर के श्रद्धालुओं से अब तक सैकड़ों किलोग्राम सोना और चांदी (ईंटें, सिक्के, बर्तन और छत्र के रूप में) दान में मिल चुके हैं, जिन्हें भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के माध्यम से सुरक्षित पिघलाकर और रिफाइन कराकर रिजर्व के रूप में रखा गया है।

  • जमीन का दायरा: अयोध्या में राम मंदिर परिसर और उसके आसपास श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए ट्रस्ट के पास लगभग 70 एकड़ से अधिक का अधिगृहीत परिसर है, जिसके आसपास की अतिरिक्त भूमि पर नए तीर्थ क्षेत्र केंद्र और होटल विकसित किए जा रहे हैं।

दक्षिण भारत में ‘भूलोक वैकुंठ’ के नाम से विख्यात केरल के त्रिशूर जिले में स्थित प्रसिद्ध गुरुवायूर श्रीकृष्ण मंदिर (Guruvayur Temple) की संपत्ति का ब्योरा एक आरटीआई (RTI) आवेदन के जरिए आधिकारिक रूप से सामने आया था:

  • बैंक में जमा राशि: गुरुवायूर देवस्वोम बोर्ड के विभिन्न बैंक खातों और एफडी में कुल 1,737.04 करोड़ रुपये जमा हैं।

  • जमीन की मिल्कियत: मंदिर के पास केरल और आसपास के इलाकों में लगभग 271.05 एकड़ बेशकीमती जमीन दर्ज है।

  • सोना और चांदी: सुरक्षा कारणों से गुरुवायूर देवस्वोम बोर्ड ने मंदिर के तहखानों में रखे प्राचीन सोने, चांदी और मूल्यवान नवरत्नों के कुल वजन और बाजार मूल्य का खुलासा सार्वजनिक रूप से नहीं किया है, लेकिन जानकारों का अनुमान है कि यह भंडार कई टन सोने और चांदी के बराबर है।

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि इन बड़े मंदिरों के पास जमा अरबों-खरबों रुपयों का इस्तेमाल कैसे किया जाता है। मंदिर प्रशासनों के नियमों के अनुसार यह धनराशि केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रहती:

  1. मुफ्त अन्नदान और महाप्रसाद: पुरी में हर रोज लाखों भक्तों के लिए विश्व की सबसे बड़ी रसोई चलती है, जबकि तिरुपति में रोजाना एक लाख से अधिक तीर्थयात्रियों को मुफ्त भोजन कराया जाता है।

  2. शिक्षा और विश्वविद्यालय: टीटीडी जैसे ट्रस्ट कई डिग्री कॉलेज, इंजीनियरिंग संस्थान, संस्कृत विश्वविद्यालय और वैदिक पाठशालाएं संचालित करते हैं।

  3. मुफ्त अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाएं: तिरुपति में पद्मावती चिल्ड्रंस हार्ट हॉस्पिटल, बर्ड (BIRRD) ऑर्थोपेडिक अस्पताल और कैंसर रिसर्च सेंटर जैसे अत्याधुनिक संस्थान चलाए जाते हैं, जहां गरीब मरीजों का मुफ्त इलाज होता है।

  4. इन्फ्रास्ट्रक्चर और जनकल्याण: रेलवे स्टेशनों, धर्मशालाओं, विश्रामालयों का निर्माण और प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत कोष में दान देने का काम भी इन्हीं मंदिर निधियों से पूरा किया जाता है।