
भारत और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहुत बड़ी और बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में पाकिस्तान की तरफ से ड्रोन गतिविधियों को लेकर सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। खुफिया रिपोर्ट्स और स्थानीय जानकारों के दावे के मुताबिक, सीमा पार से भारतीय क्षेत्र में अवैध हथियारों, हेरोइन और विस्फोटकों की तस्करी के लिए ड्रोन की जैसे बाढ़ आ गई है। दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और तस्करों के गठजोड़ के जरिए रोजाना 100 से अधिक ड्रोन भारतीय सीमा में धकेलने की साजिश रची जा रही है। इस लगातार बढ़ते हवाई खतरे के बीच सीमा सुरक्षा बल (BSF) और पंजाब पुलिस के जवान दिन-रात अपनी जान जोखिम में डालकर देश की रक्षा में जुटे हैं, लेकिन इस अप्रत्याशित ड्रोन बाढ़ को पूरी तरह रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक बहुत बड़ी और तकनीकी चुनौती खड़ी हो गई है।
पंजाब से सटी लगभग 553 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पिछले कुछ महीनों में ड्रोन गतिविधियों में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की गई है। तरनतारन, फिरोजपुर, अमृतसर, गुरदासपुर और फाजिल्का जैसे सीमावर्ती जिलों के ग्रामीण इलाकों में रात के वक्त ड्रोन की भिनभिनाहट आम बात बन गई है। पाकिस्तानी तस्कर अब पारंपरिक रास्तों और सुरंगों के बजाय आधुनिक चीनी तकनीक से लैस क्वाडकॉप्टर और हेवी-ड्यूटी ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। इन ड्रोनों के जरिए सिर्फ ड्रग्स ही नहीं, बल्कि एके-47 राइफलें, टिफिन बम, ग्रेनेड और कारतूस भी भारतीय सीमा के भीतर गिराए जा रहे हैं। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ड्रोन के जरिए पंजाब के युवाओं को नशे के दलदल में धकेलने के साथ-साथ देश की आंतरिक शांति को भंग करने का एक सुनियोजित षड्यंत्र रचा जा रहा है, ताकि सीमा के पास लगातार अशांति का माहौल बनाया जा सके।
इस अदृश्य और आधुनिक हवाई खतरे से निपटने के लिए बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। सीमा पर हाई-टेक नाइट विजन कैमरे, एंटी-ड्रोन जैमर (Anti-Drone Jammers), रडार सिस्टम और आधुनिक असॉल्ट राइफलों को तैनात किया गया है। बीएसएफ के जवान हर रात आसमान में गश्त करते हैं और ड्रोन की आवाज सुनते ही उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर कई ड्रोन मार गिराने में सफल भी रहे हैं। हाल ही के महीनों में बीएसएफ ने भारी मात्रा में हेरोइन और हथियारों के साथ कई अत्याधुनिक ड्रोन बरामद किए हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि संख्या में बहुत ज्यादा होने और छोटे आकार के ड्रोन होने के कारण कई बार घने कोहरे या अंधेरे में रडार की नजरों से बचकर ये ड्रोन खेत-खलिहानों तक पहुंच जाते हैं। बीएसएफ और अन्य सुरक्षा बल इन चुनौतियों से निपटने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और थर्मल इमेजिंग आधारित डिफेंस सिस्टम को और अधिक मजबूत कर रहे हैं।
ड्रोन की इस लगातार बढ़ती बाढ़ के बीच पंजाब के सीमावर्ती गांवों के नागरिकों की भूमिका भी बेहद सराहनीय रही है। खेतों में काम करने वाले किसान और ग्रामीण अब खुद सुरक्षा बलों के कान और आंख बन चुके हैं। जैसे ही आसमान में किसी ड्रोन के उड़ने की आवाज सुनाई देती है, ग्रामीण तुरंत स्थानीय पुलिस और बीएसएफ को सूचित करते हैं। कई मौकों पर सतर्क ग्रामीणों ने बीएसएफ के साथ मिलकर तस्करों के मंसूबों को नाकाम किया है। पंजाब पुलिस और बीएसएफ मिलकर लगातार सीमावर्ती इलाकों में जन-जागरूकता अभियान चला रहे हैं, ताकि ग्रामीणों को यह समझाया जा सके कि यदि उन्हें कोई भी संदिग्ध वस्तु या पैकेट खेतों में मिले, तो वे उसे तुरंत सुरक्षा बलों को सौंप दें और किसी भी खतरे से बचें।
आज के डिजिटल और आधुनिक Generative AI के युग में सुरक्षा का दायरा केवल जमीन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि साइबर और एयरस्पेस सुरक्षा भी उतनी ही अहम हो चुकी है। गूगल, बिंग और वैश्विक सर्च इंजनों पर ‘Pakistan Drone Intrusion Punjab BSF’ सबसे अधिक पढ़े जाने वाले विषयों में शामिल है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की तरफ से लगातार आ रहे इन ड्रोनों से निपटने के लिए हमें स्वदेशी एंटी-ड्रोन तकनीक, लेजर वेपन सिस्टम और स्पूफिंग तकनीक का बड़े पैमाने पर विस्तार करना होगा। भारत सरकार ने भी इस दिशा में कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं और सीमा पर सुरक्षा चक्र को इतना अभेद्य बनाया जा रहा है कि दुश्मन का कोई भी नापाक ड्रोन भारतीय सीमा में टिक न सके।
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