Cleaning Brass Copper Utensils: जन्माष्टमी पर बिना घिसे ऐसे चमकाएं तांबे-पीतल के बर्तन और मूर्तियां, चमक देखकर सब रह जाएंगे हैरान

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर मंदिरों और घरों में पूजा-पाठ, कान्हा के जन्मोत्सव, अभिषेक और भोग की तैयारियां जोरों पर होती हैं। जन्माष्टमी की पूजा में तांबे और पीतल के बर्तनों, दीपकों, घंटियों, थालियों और लड्डू गोपाल की पीतल की मूर्तियों का विशेष उपयोग किया जाता है। हालांकि, हवा में मौजूद ऑक्सीजन और नमी (ऑक्सीकरण) के संपर्क में आने के कारण तांबे और पीतल के बर्तन बहुत जल्दी काले या हरे पड़ने लगते हैं और उनकी चमक फीकी पड़ जाती है। अधिकांश लोग इन्हें रगड़-रगड़ कर साफ करने में काफी समय और मेहनत गंवा देते हैं, जिससे बर्तनों पर खरोंच भी आ जाती है। यदि आप बिना किसी मेहनत और बिना घिसे कुछ ही मिनटों में इन्हें सोने की तरह चमकाना चाहते हैं, तो घर की रसोई में मौजूद आसान और जादुई नुस्खों को आजमा सकते हैं।

यह नुस्खा अत्यधिक काले पड़ चुके छोटे बर्तनों, दीयों और पूजा की घंटियों के लिए सबसे अचूक और तेज तरीका है।

  • सामग्री: 1 कप सफेद सिरका (White Vinegar) और 2 बड़े चम्मच सादा नमक।

  • विधि: एक बड़े बर्तन में सिरका लें और उसमें नमक डालकर अच्छी तरह घोल लें। अब इस मिश्रण को तांबे या पीतल के काले बर्तनों पर एक सूती कपड़े या ब्रश की मदद से लगाएं या सीधे बर्तनों को इस घोल में 2 से 3 मिनट के लिए डुबोकर छोड़ दें। सिरके का एसिटिक एसिड और नमक का सोडियम क्लोराइड आपस में मिलकर तुरंत कॉपर ऑक्साइड की काली परत को पिघला देते हैं।

  • अंतिम चरण: 2 मिनट बाद बर्तन को सामान्य साफ पानी से धोएं और सूखे साफ कपड़े से पोंछ लें। बर्तन बिना किसी मेहनत के बिल्कुल नए जैसे चमकने लगेंगे।

पीतल की बड़ी थालियों, कलश और बर्तनों के नक्काशीदार कोनों से जमी हुई मैल निकालने के लिए यह पेस्ट बेहद कारगर है।

  • सामग्री: आधा कटा नींबू और 1 बड़ा चम्मच बेकिंग सोडा।

  • विधि: एक कटोरी में बेकिंग सोडा लें और उस पर नींबू का रस निचोड़ें। जब इसमें झाग उठने लगे, तो आधे कटे नींबू के छिलके से इस पेस्ट को लेकर बर्तन या मूर्ति पर हल्के हाथों से चारों तरफ फैला दें।

  • असर: इसे केवल 5 मिनट तक लगा रहने दें। रासायनिक क्रिया से सारा कालापन खुद ब खुद छूट जाएगा। इसके बाद हल्के स्पंज से पानी डालते हुए धो लें और मुलायम तौलिए से सुखा लें।

आयुर्वेद और पारंपरिक भारतीय घरों में सदियों से इमली का उपयोग धातु के बर्तनों को चमकाने के लिए किया जाता रहा है।

  • सामग्री: थोड़ी सी पकी इमली (पानी में भिगोई हुई) या 1 कप खट्टी छाछ/दही।

  • विधि: इमली को थोड़े से गुनगुने पानी में मसलकर गाढ़ा पल्प (गूदा) बना लें। इस पल्प को तांबे और पीतल के बर्तनों पर लेप की तरह लगा दें और 10 मिनट के लिए छोड़ दें। इमली में मौजूद प्राकृतिक टार्टरिक एसिड धातु की मूल चमक को तुरंत वापस ले आता है।

  • धोने का तरीका: 10 मिनट बाद सादे पानी से धोकर सूखे कपड़े से अच्छी तरह पोंछ लें।

यदि पीतल या तांबे की मूर्तियों पर महीन डिजाइन बनी हुई है और आप नहीं चाहते कि किसी भी प्रकार की खरोंच आए, तो यह क्लींजिंग उबटन सबसे सुरक्षित है।

  • सामग्री: 2 चम्मच गेहूं का आटा, 1 चम्मच नमक और पेस्ट बनाने लायक सिरका।

  • विधि: तीनों चीजों को मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट बनाएं और इसे पूजा के बर्तनों व मूर्तियों पर लगाकर 10 से 15 मिनट तक सूखने दें।

  • सफाई: जब लेप हल्का सूख जाए, तो गुनगुने पानी की धार के नीचे उंगलियों से सहलाते हुए इसे धो लें। यह धातु को बिना नुकसान पहुंचाए गहरी सफाई देता है।

  • पूरी तरह सुखाना अनिवार्य: तांबे और पीतल के बर्तनों को धोने के बाद कभी भी खुद से सूखने के लिए गीला न छोड़ें। हवा और पानी की बूंदों से उन पर फिर से पानी के धब्बे और कालापन आ जाता है। धोने के तुरंत बाद एक सूखे माइक्रोफाइबर या सूती कपड़े से रगड़कर पूरी नमी सुखा लें।

  • नारियल तेल की पतली परत: पूरी तरह सूख जाने के बाद एक बूंद शुद्ध नारियल तेल को रुई के फाहे पर लेकर बर्तनों और मूर्तियों पर हल्की सी पॉलिश कर दें। यह बर्तनों पर एक सुरक्षात्मक परत बना देता है, जिससे हवा की नमी धातु तक नहीं पहुंच पाती और जन्माष्टमी के कई हफ्तों बाद तक बर्तन बिल्कुल चमचमाते रहते हैं।