
सर्दियों का मौसम हो या मॉनसून की उमस, कंधों पर गिरने वाले सफेद-पीले रंग के रूसी (डैंड्रफ) के फ्लेक्स लाखों लोगों के लिए केवल असहजता और शर्मिंदगी ही नहीं, बल्कि सिर में लगातार होने वाली तेज खुजली और हेयरफॉल का बड़ा कारण बन जाते हैं। समाज में यह आम धारणा बनी हुई है कि अगर किसी के सिर में डैंड्रफ है, तो इसका सीधा मतलब है कि वह बालों को ठीक से धोता नहीं है या उसके सिर में गंदगी जमा हो गई है। हालांकि, डर्मेटोलॉजी (त्वचा विज्ञान) और ट्राइकोलॉजी के विशेषज्ञ इस बात को पूरी तरह खारिज करते हैं। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, सिर में होने वाला डैंड्रफ केवल धूल-मिट्टी या अस्वच्छता का नतीजा नहीं होता, बल्कि यह स्कैल्प (सिर की त्वचा) के अंदरूनी बायोम, ग्रंथियों और शरीर के आंतरिक स्वास्थ्य में होने वाली कई जटिल जैविक प्रतिक्रियाओं का परिणाम है। बिना सही कारण जाने केवल सामान्य तेल या शैंपू बदलने से यह समस्या कभी जड़ से खत्म नहीं होती।
डैंड्रफ और गंदगी का मिथक: सिर की त्वचा पर क्या होता है असली खेल
हमारी त्वचा की एक स्वाभाविक प्रक्रिया होती है जिसे ‘सेल टर्नओवर’ (Skin Cell Turnover) कहा जाता है। सामान्य स्थिति में सिर की पुरानी मृत कोशिकाएं (Dead Skin Cells) लगभग 28 से 30 दिनों में धीरे-धीरे झड़ती हैं और उनकी जगह नई कोशिकाएं आ जाती हैं। यह प्रक्रिया इतनी सूक्ष्म होती है कि सामान्य आंखों से दिखाई नहीं देती। जब किसी अंदरूनी या बाहरी कारण से यह त्वचा नवीनीकरण चक्र तेज हो जाता है और मृत कोशिकाएं 28 दिनों के बजाय मात्र 2 से 7 दिनों के भीतर तेजी से बनने और झड़ने लगती हैं, तो वे आपस में चिपककर सफेद या पीले गुच्छों का रूप ले लेती हैं, जिन्हें हम ‘डैंड्रफ’ कहते हैं। इसलिए डैंड्रफ केवल सिर पर जमी बाहरी धूल नहीं है, बल्कि यह त्वचा की कोशिकाओं के अत्यधिक तेजी से झड़ने की एक पैथोलॉजिकल स्थिति है।
‘मलासेजिया’ फंगस और सीबम का असंतुलन: फ्लेक्स बनने का मुख्य जैविक कारण
डैंड्रफ के सबसे प्रमुख कारणों में ‘मलासेजिया ग्लोबोसा’ (Malassezia Globosa) नामक फंगस (यीस्ट) की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है। यह सूक्ष्म फंगस हर स्वस्थ इंसान के सिर की त्वचा पर प्राकृतिक रूप से मौजूद रहता है। जब सिर की वसामय ग्रंथियां (Sebaceous Glands) जरूरत से ज्यादा तेल (सीबम) बनाने लगती हैं, तो यह फंगस उस सीबम को अपना भोजन बना लेता है।
सीबम को पचाने की प्रक्रिया में यह फंगस एक उप-उत्पाद के रूप में ‘ओलिक एसिड’ (Oleic Acid) छोड़ता है। दुनिया भर में 50 प्रतिशत से अधिक लोगों की स्कैल्प इस ओलिक एसिड के प्रति अत्यधिक संवेदनशील (हाइपरसेंसिटिव) होती है। जब ओलिक एसिड त्वचा में जलन और सूजन पैदा करता है, तो स्कैल्प खुद को बचाने के लिए तेजी से कोशिकाओं को बहाने लगती है, जिससे भारी मात्रा में डैंड्रफ के फ्लेक्स बनने लगते हैं।
सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस, सोरायसिस और केमिकल हेयर प्रोडक्ट्स का साइड इफेक्ट
डैंड्रफ के पीछे कई बार त्वचा से जुड़े अन्य मेडिकल डिसऑर्डर्स भी छिपे होते हैं:
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सेबोरहाइक डर्मेटाइटिस (Seborrheic Dermatitis): यह डैंड्रफ का एक गंभीर रूप है। इसमें न केवल सिर की त्वचा पर बल्कि भौंहों, नाक के किनारों, कानों के पीछे और छाती पर भी चिपचिपी, पीली और पपड़ीदार परत जमने लगती है, जिसमें तेज जलन और लालिमा होती है।
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स्कैल्प सोरायसिस (Scalp Psoriasis): यह एक ऑटोइम्यून स्थिति है, जिसमें त्वचा की कोशिकाएं बहुत तेजी से बढ़ती हैं और सिर पर चांदी जैसी चमकीली, मोटी और सूखी पपड़ियां बन जाती हैं, जिन्हें कई बार लोग साधारण डैंड्रफ समझकर अनदेखा कर देते हैं।
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कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस (Contact Dermatitis): सल्फेट्स, पैराबेंस, आर्टिफिशियल खुशबू, हेयर डाई और केमिकल युक्त सीरम या जेल का अत्यधिक उपयोग सिर की त्वचा को छील देता है, जिससे एलर्जिक रिएक्शन के रूप में ड्राई फ्लेक्स गिरने लगते हैं।
ड्राई स्कैल्प बनाम ऑयली डैंड्रफ: क्या आप भी दोनों में खा रहे हैं धोखा?
अधिकांश लोग ड्राई स्कैल्प (रूखी त्वचा) और असली डैंड्रफ के बीच का अंतर नहीं समझ पाते, जिसके कारण उनका इलाज गलत दिशा में चला जाता है।
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ड्राई स्कैल्प (Dry Scalp): जब पूरे शरीर और सिर की त्वचा में नमी की कमी होती है, हवा बहुत ठंडी या शुष्क होती है, या आप अत्यधिक गर्म पानी से सिर धोते हैं, तो सिर से बहुत छोटे, हल्के और सूखे सफेद कण झड़ते हैं। इसमें बाल चिपचिपे नहीं होते। इसमें तेल या मॉइस्चराइजिंग कंडीशनर लगाने से आराम मिलता है।
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ऑयली डैंड्रफ (Oily Dandruff): यह फंगल इन्फेक्शन और अत्यधिक तेल उत्पादन के कारण होता है। इसके फ्लेक्स बड़े, पीले, चिपचिपे और तैलीय होते हैं जो बालों की जड़ों से चिपके रहते हैं और नाखूनों से खुरचने पर निकलते हैं। इस स्थिति में अगर आप सिर में भारी तेल (जैसे सरसों या नारियल तेल) लगाते हैं, तो फंगस को और अधिक भोजन मिलता है और डैंड्रफ कम होने के बजाय कई गुना बढ़ जाता है।
तनाव, खानपान में पोषक तत्वों की कमी और बदलता मौसम
डैंड्रफ का सीधा संबंध आपके मानसिक तनाव और लाइफस्टाइल से भी होता है। अत्यधिक मानसिक तनाव होने पर शरीर में ‘कोर्टिसोल’ हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जो इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है और स्कैल्प पर सीबम के उत्पादन को अनियंत्रित कर देता है। इसके अलावा, अत्यधिक रिफाइंड शुगर, जंक फूड, डेयरी प्रोडक्ट्स और सैचुरेटेड फैट का सेवन शरीर में इन्फ्लेमेशन बढ़ाता है। शरीर में जिंक (Zinc), बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन्स (विशेषकर B6 और B12) और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स की कमी भी त्वचा की नमी और बैरियर फंक्शन को कमजोर कर डैंड्रफ को न्योता देती है।
मौसम और स्थानीय वातावरण भी अहम भूमिका निभाते हैं। अत्यधिक उमस और पसीने वाले मौसम में फंगस तेजी से पनपता है, जबकि सर्दियों की शुष्क हवा और महानगरों में आने वाले ‘हार्ड वाटर’ (खारे व भारी पानी में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम सॉल्ट्स) स्कैल्प के नेचुरल पीएच (pH Balance) को बिगाड़कर डैंड्रफ को और विकराल बना देते हैं।
डैंड्रफ से हमेशा के लिए छुटकारा पाने के लिए क्या कहते हैं डर्मेटोलॉजिस्ट
डैंड्रफ की समस्या को नियंत्रित करने के लिए केवल कॉस्मेटिक शैंपू काफी नहीं होते; इसके लिए सही एक्टिव इंग्रीडिएंट्स वाले मेडिकेटेड प्रोडक्ट्स का चुनाव जरूरी है:
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एक्टिव इंग्रीडिएंट्स वाले शैंपू: ऐसे एंटी-डैंड्रफ शैंपू का इस्तेमाल करें जिनमें ‘कीटोकोनाज़ोल’ (Ketoconazole), ‘जिंक पाइरिथियोन’ (ZPTO), ‘सेलेनियम सल्फाइड’ (Selenium Sulfide), ‘सैलिसिलिक एसिड’ (Salicylic Acid) या ‘कोल टार’ मौजूद हो।
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लगाने का सही तरीका: मेडिकेटेड शैंपू को केवल बालों पर लगाकर तुरंत धोने के बजाय स्कैल्प की जड़ों में उंगलियों के पोरों से लगाएं और कम से कम 5 मिनट तक लगा रहने दें ताकि एक्टिव साल्ट्स फंगस पर असर कर सकें, फिर गुनगुने पानी से धोएं।
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ऑयलिंग से परहेज: यदि आपको ऑयली डैंड्रफ और खुजली की समस्या है, तो सिर में तेल लगाने से पूरी तरह बचें।
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संतुलित आहार और हाइड्रेशन: भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, अलसी के बीज, अखरोट, अंडे और पर्याप्त मात्रा में पानी शामिल करें और दिन में कम से कम 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लें।
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