
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में बहुत कम ऐसे दुर्लभ और भावुक पल देखने को मिलते हैं जब कोई दिग्गज खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम के लिए खेल रहा हो और उसी दौरान उसके बेटे को भी सीनियर टीम की अंतरराष्ट्रीय जर्सी पहनने का ऐतिहासिक मौका मिल जाए। ऐसा ही एक अद्भुत और यादगार नजारा एशियन गेम्स 2026 (Asian Games 2026) के पुरुष क्रिकेट इवेंट के पहले मुकाबले में देखने को मिला। अफगानिस्तान क्रिकेट टीम के दिग्गज पूर्व कप्तान और स्टार ऑलराउंडर मोहम्मद नबी (Mohammad Nabi) के 20 वर्षीय बेटे हसन ईसाखिल (Hassan Eisakhil) ने आखिरकार अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपना बहुप्रतीक्षित डेब्यू कर लिया है। जापान के खिलाफ खेले गए इस उद्घाटन मुकाबले में हसन को अफगानिस्तान की सीनियर प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया, जिसके साथ ही उन्होंने एक नया इतिहास रच दिया।
इस डेब्यू की सबसे दिलचस्प और ध्यान खींचने वाली बात यह है कि 41 वर्षीय मोहम्मद नबी अभी भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पूरी तरह सक्रिय हैं और संन्यास से काफी दूर हैं। नबी ने महज कुछ ही दिन पहले 17 सितंबर को भारत के खिलाफ दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेला था। पिता के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हुए बेटे का डेब्यू करना खेल जगत में एक विरला संयोग है। हालांकि, डेब्यू का यह बड़ा अवसर व्यक्तिगत प्रदर्शन के लिहाज से युवा बल्लेबाज हसन ईसाखिल के लिए किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ और वह अपने पहले ही मुकाबले में बल्ले से कोई खास प्रभाव छोड़ने में पूरी तरह नाकाम रहे।
शीर्ष क्रम के विशेषज्ञ बल्लेबाज के रूप में टीम में शामिल किए गए हसन ईसाखिल से क्रिकेट फैंस और चयनकर्ताओं को काफी उम्मीदें थीं। घरेलू क्रिकेट और अंडर-19 स्तर पर आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाने वाले हसन जब क्रीज पर उतरे तो उन पर अपने दिग्गज पिता के नाम और अपेक्षाओं का भारी दबाव साफ नजर आ रहा था। जापानी गेंदबाजों की अनुशासित लाइन-लेंथ के सामने हसन खुलकर अपने शॉट नहीं खेल सके और रन बनाने के लिए लगातार जूझते दिखे।
हसन ईसाखिल ने अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय पारी में 10 गेंदों का सामना किया, लेकिन वह केवल 3 रन ही जोड़ सके। उनके संघर्ष को जापानी गेंदबाज रेओ सकुरानो-थॉमस ने समाप्त किया, जब उन्होंने हसन को चकमा देकर पवेलियन का रास्ता दिखा दिया। अपने पहले ही अंतरराष्ट्रीय मैच में बेहद सस्ते में आउट होने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि टीम प्रबंधन आगामी अहम मुकाबलों में इस युवा खिलाड़ी पर भरोसा बनाए रखता है या अगले मैच की प्लेइंग इलेवन में बदलाव का रास्ता चुनता है।
जापान और अफगानिस्तान के बीच खेले गए इस मुकाबले में टॉस की बाजी जापान ने जीती और पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। पहले बल्लेबाजी करने उतरी अफगानिस्तान की टीम निर्धारित 20 ओवरों में 6 विकेट के नुकसान पर 129 रन ही बना सकी। एशियन गेम्स की पिछली सिल्वर मेडलिस्ट टीम के लिए यह स्कोर थोड़ा मामूली नजर आ रहा था। टीम की ओर से सलामी बल्लेबाज मोहम्मद अकरम ने सबसे अधिक संघर्ष दिखाया और 29 गेंदों में 34 रनों की तेजतर्रार पारी खेली, जिसमें 2 आकर्षक चौके और 6 विशाल छक्के शामिल रहे। अकरम के अलावा अफगानिस्तान का कोई भी अन्य बल्लेबाज 30 रन के आंकड़े को नहीं छू सका। जापान की ओर से शोमा सुगाया-स्लेटर और इब्राहिम ताकाहाशी ने उम्दा गेंदबाजी का मुजाहिरा करते हुए 2-2 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए।
130 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जापान की टीम अफगान गेंदबाजों की धारदार और कसी हुई गेंदबाजी के सामने टिक नहीं सकी। लक्ष्य का पीछा करते हुए पूरी जापानी टीम 19.3 ओवरों में मात्र 81 रनों पर ढेर हो गई। जापान के लिए ओपनर रेओ सकुरानो-थॉमस ने 3 चौकों की मदद से सर्वाधिक 23 रन बनाए, लेकिन बाकी का बैटिंग ऑर्डर ताश के पत्तों की तरह ढह गया। टीम का कोई भी अन्य बल्लेबाज 20 रन के आंकड़े को पार नहीं कर सका और कुल 8 खिलाड़ी तो दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सके। इस तरह अफगानिस्तान ने 48 रनों के बड़े अंतर से यह मुकाबला जीतकर टूर्नामेंट का विजयी आगाज किया।
ग्रुप-ए में मजबूत स्थिति में पहुंची अफगानिस्तान की टीम का अगला मुकाबला शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को नेपाल के खिलाफ निर्धारित है। नेपाल की टीम हाल के वर्षों में टी20 प्रारूप में बेहद प्रतिस्पर्धी साबित हुई है, ऐसे में अफगानिस्तान इस मुकाबले को कतई हल्के में नहीं ले सकता। इस मैच में जीत हासिल कर अफगान टीम सीधे तौर पर अगले चरण यानी क्वार्टर फाइनल राउंड के लिए अपनी जगह पक्की कर लेगी।
टीम प्रबंधन के सामने अब सबसे बड़ा सवाल युवा हसन ईसाखिल को लेकर होगा। क्या मुख्य कोच और कप्तान उन्हें अपनी लय हासिल करने के लिए नेपाल के खिलाफ एक और मौका देंगे, या फिर नॉकआउट के दबाव को देखते हुए किसी अनुभवी चेहरे को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जाएगा। बहरहाल, पहले मैच में नाकामी के बावजूद यह साफ है कि मोहम्मद नबी की विरासत को आगे बढ़ाने की दिशा में हसन ईसाखिल का पहला कदम पड़ चुका है और आने वाले समय में दुनिया की नजरें इस युवा अफगान स्टार पर टिकी रहेंगी।
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