
भारत और वेस्टइंडीज के बीच केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले जा रहे पहले एकदिवसीय मुकाबले के शुरू होते ही एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। टीम इंडिया के कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का निर्णय लिया, लेकिन जब अंतिम एकादश (प्लेइंग 11) की सूची सामने आई तो उसमें भारत के प्रमुख तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज का नाम नदारद था। जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा जैसे सीनियर गेंदबाजों की गैरमौजूदगी में जिस गेंदबाज को पेस अटैक की रीढ़ माना जा रहा था, उसे ही बाहर बैठाए जाने के फैसले ने हर किसी को हैरान कर दिया।
मैच शुरू होने के कुछ ही देर बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर आग की तरह फैलने लगी। इस वायरल तस्वीर में हेड कोच गौतम गंभीर, तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज, भारतीय टीम के गेंदबाजी कोच मोर्ने मोर्कल और तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा बाउंड्री लाइन के पास गंभीर मुद्रा में बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं। कई सोशल मीडिया हैंडल्स और क्रिकेट फैंस द्वारा यह सनसनीखेज दावा किया जाने लगा कि टॉस से ठीक पहले मोहम्मद सिराज और हेड कोच गौतम गंभीर के बीच टीम चयन या रणनीति को लेकर तीखी बहस हुई थी, जिसके परिणाम स्वरूप सिराज को प्लेइंग 11 से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस तस्वीर के साथ किए जा रहे दावों ने क्रिकेट गलियारों में तूफान ला दिया है। तस्वीरों में गौतम गंभीर के चेहरे के कड़े भाव और मोहम्मद सिराज के हाथ के इशारों को आधार बनाकर यह कयास लगाए जाने लगे कि दोनों के बीच सब कुछ ठीक नहीं है। हालांकि निष्पक्ष रिपोर्टिंग और टीम मैनेजमेंट से जुड़े सूत्रों की मानें तो इस तरह के दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आधुनिक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मैच से ठीक पहले मुख्य कोच, गेंदबाजी कोच और तेज गेंदबाजों के बीच पिच की परिस्थितियों, फील्ड प्लेसमेंट और बॉलिंग प्लान को लेकर गहन चर्चा होना एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है।
बावजूद इसके, खेल विशेषज्ञों का मानना है कि सिराज जैसे मैच विनर गेंदबाज को बेंच पर बिठाना और उनकी जगह अपेक्षाकृत नए तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ को कैप थमाना कई गंभीर तकनीकी सवाल जरूर खड़े करता है। प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बराड़ के साथ जब नई गेंद साझा करने का जिम्मा सौंपा गया, तो भारतीय आक्रमण में वह धार और अनुशासन बिल्कुल नजर नहीं आया जिसके लिए सिराज जाने जाते हैं। यही वजह रही कि फैंस और पूर्व क्रिकेटरों ने सोशल मीडिया पर टीम मैनेजमेंट के इस फैसले की तीखी आलोचना शुरू कर दी।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गंभीर पहलू भारतीय टीम का दीर्घकालिक विजन माना जा रहा है। जसप्रीत बुमराह इस समय एशियन गेम्स के चलते जापान में मौजूद हैं और कई अन्य प्रमुख तेज गेंदबाजों को आराम दिया गया है। ऐसे में हर किसी की समझ यही थी कि इस पूरी घरेलू वनडे सीरीज में मोहम्मद सिराज भारतीय गेंदबाजी के अगुआ होंगे। पहले ही मुकाबले में उन्हें ड्रॉप किए जाने के बाद अब यह चर्चा जोर पकड़ने लगी है कि क्या हेड कोच गौतम गंभीर और चयनकर्ता 2027 के वनडे वर्ल्ड कप की योजना में सिराज को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं?
टीम मैनेजमेंट के हालिया रुख से संकेत मिलता है कि वे प्लेइंग 11 में बैटिंग डेप्थ और ऑलराउंड विकल्पों को ज्यादा तरजीह देना चाहते हैं। हार्दिक पांड्या के बैकअप के रूप में युवा ऑलराउंडर नितीश कुमार रेड्डी को टीम में शामिल किया गया और गेंदबाजी में विविधता लाने के लिए लंबे कद के पेसर्स पर दांव लगाया गया। इसके अलावा नमन धीर जैसे नए चेहरों को मध्यक्रम में मौका दिया गया। इस प्रयोग के चक्कर में एक स्थापित फ्रंटलाइन पेसर को बाहर करना टीम के संतुलन पर भारी पड़ता नजर आया।
मैदान पर जो कुछ घटा, उसने सिराज को बाहर रखने के फैसले को और अधिक कटघरे में खड़ा कर दिया। टॉस जीतकर पहले फील्डिंग करने उतरी टीम इंडिया के तेज गेंदबाज वेस्टइंडीज के सलामी बल्लेबाजों पर बिल्कुल दबाव नहीं बना सके। तिरुवनंतपुरम की पिच पर जहां शुरुआत में नमी और घास का फायदा उठाकर विकेट निकाले जाने की उम्मीद थी, वहां वेस्टइंडीज के ओपनर जॉन कैंपबेल और जस्टिन ग्रीव्स ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर क्लास ली। दोनों ने पहले विकेट के लिए 135 रनों की मजबूत शतकीय साझेदारी कर डाली।
जॉन कैंपबेल ने 62 रनों की आक्रामक पारी खेली, जबकि उनके जोड़ीदार जस्टिन ग्रीव्स ने शानदार शतक जड़कर भारतीय खेमे की पेशानी पर बल ला दिए। प्रसिद्ध कृष्णा और अपना डेब्यू मैच खेल रहे गुरनूर बराड़ दोनों ही कैरेबियाई बल्लेबाजों को बैकफुट पर धकेलने में नाकाम रहे। अंत में अनुभवी कलाई के स्पिनर कुलदीप यादव ने आकर मैच का रुख पलटा और दोनों जमे हुए सलामी बल्लेबाजों को पवेलियन भेजकर वेस्टइंडीज की आधी टीम को समेटने की नींव रखी। यदि शुरुआत में सिराज नई गेंद से गेंदबाजी कर रहे होते, तो शायद मैच की रूपरेखा काफी अलग हो सकती थी।
मैच के दौरान जैसे-जैसे वेस्टइंडीज का स्कोरबोर्ड तेजी से भागता गया, वैसे-वैसे इंटरनेट पर गौतम गंभीर और टीम मैनेजमेंट के खिलाफ आक्रोश बढ़ता चला गया। क्रिकेट प्रशंसकों का कहना है कि जब जसप्रीत बुमराह टीम में नहीं हैं, तो मोहम्मद सिराज जैसे अनुभवी गेंदबाज को ड्रॉप करके टीम के बॉलिंग अटैक को कमजोर करना एक बहुत बड़ी रणनीतिक भूल है। फैंस यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या किसी निजी असहमति या नए प्रयोगों की जिद में आकर टीम के मुख्य हथियार को दरकिनार किया जा रहा है?
गौतम गंभीर के कार्यकाल में कई कड़े और अप्रत्याशित फैसले देखने को मिले हैं, लेकिन सिराज को लेकर उपजा यह विवाद आने वाले मैचों में और बड़ा रूप ले सकता है। यदि भारतीय टीम यह मुकाबला गंवाती है या सीरीज के अगले मैचों में गेंदबाजी संघर्ष करती है, तो हेड कोच और कप्तान शुभमन गिल को सिराज के बाहर बैठने की ठोस वजह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी होगी। फिलहाल तिरुवनंतपुरम के मैदान पर इस मैच के नतीजे के साथ-साथ ड्रेसिंग रूम के अंदरूनी माहौल पर भी पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
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