
अमेरिकी विदेश विभाग और राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी वित्त वर्ष 2027 के लिए प्रमुख ड्रग ट्रांजिट और अवैध मादक पदार्थ उत्पादक देशों की सालाना सूची में भारत को एक बार फिर शामिल किया गया है। इस सूची में भारत के साथ चीन, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और मैक्सिको समेत कुल 23 देशों के नाम दर्ज हैं। हालांकि, इस आधिकारिक सूची के जारी होते ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कड़े कदमों की खुलकर तारीफ की है। ट्रंप ने एक प्रेसिडेंशियल डिटर्मिनेशन (आधिकारिक उद्घोषणा) में साफ तौर पर कहा कि वे अवैध अफीम पोस्त की खेती के खिलाफ भारत की सख्त कार्रवाई और फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन की सुरक्षा को मजबूत करने के मोदी सरकार के प्रयासों का पुरजोर स्वागत करते हैं।
अक्सर जब कोई देश अमेरिका की ऐसी निगरानी सूचियों में आता है, तो इसे कूटनीतिक रूप से आलोचना के तौर पर देखा जाता है, लेकिन इस बार अमेरिकी रुख इसके ठीक उलट नजर आया। व्हाइट हाउस ने यह साफ कर दिया कि भारत को इस सूची में शामिल किए जाने का मतलब यह कतई नहीं है कि भारत सरकार नशीले पदार्थों के खिलाफ ढिलाई बरत रही है या अमेरिका के साथ सहयोग नहीं कर रही।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने आधिकारिक बयान में विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दो प्रमुख कदमों को सराहा। पहला कदम भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के संवेदनशील इलाकों में अवैध अफीम की खेती (Illicit Opium Poppy Cultivation) पर सेटेलाइट ट्रैकिंग और फील्ड ऑपरेशंस के जरिए चलाया गया बड़ा अभियान है। भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में अवैध अफीम के खेतों को बड़े पैमाने पर नष्ट किया है और ड्रोन सर्विलांस के जरिए तस्करों के नेटवर्क को तोड़ा है।
दूसरा प्रमुख पहलू ‘सप्लाई चेन इंटीग्रिटी’ यानी वैध दवाओं और केमिकल प्रीकर्सर की आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा से जुड़ा है। भारत दुनिया की सबसे बड़ी दवा निर्माण और केमिकल प्रोसेसिंग शक्तियों में से एक है। अक्सर अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट्स लीगल केमिकल्स को डायवर्ट करके फेंटानिल या हेरोइन जैसी सिंथेटिक ड्रग्स बनाने की कोशिश करते हैं। ट्रंप प्रशासन ने इस बात की सराहना की कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने केमिकल प्रीकर्सर्स की मॉनिटरिंग के लिए सख्त डिजिटल ट्रैकिंग नियम लागू किए हैं, जिससे तस्करों के लिए भारतीय बंदरगाहों और रासायनिक हबों का दुरुपयोग करना लगभग नामुमकिन हो गया है। इसके साथ ही, ‘यूनाइटेड स्टेट्स-इंडिया ड्रग पॉलिसी फ्रेमवर्क’ के तहत दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां रीयल-टाइम डेटा साझा कर रही हैं, जिसकी ट्रंप ने प्रशंसा की।
अमेरिकी कानून के तहत हर साल राष्ट्रपति को उन देशों की पहचान कर कांग्रेस को सूची सौंपनी होती है जहां से होकर बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ अमेरिका तक पहुंचते हैं या जहां उनका उत्पादन होता है। ट्रंप प्रशासन ने अपनी अधिसूचना में यह स्पष्ट किया कि इस लिस्ट में किसी देश का नाम होना उसकी सरकार की विफलता का प्रतीक नहीं है। इसके पीछे मुख्य कारण उस देश की भौगोलिक स्थिति (Geographical Location), बड़े वैश्विक व्यापार मार्ग और विशाल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क होते हैं।
भारत दुनिया के दो सबसे बड़े अफीम और हेरोइन उत्पादक क्षेत्रों—’गोल्डन क्रिसेंट’ (ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान) तथा ‘गोल्डन ट्राएंगल’ (म्यांमार, लाओस और थाईलैंड) के ठीक बीच में स्थित है। इस भौगोलिक स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल भारत को एक प्राकृतिक ट्रांजिट रूट (पारगमन मार्ग) के रूप में इस्तेमाल करने की लगातार कोशिश करते हैं। अमेरिकी प्रशासन ने माना कि भारत की नौसेना, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), बीएसएफ और कोस्ट गार्ड समुद्र व सीमाओं पर रिकॉर्ड स्तर की जब्ती कर रहे हैं, इसलिए भारत का नाम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सूची में है, न कि इच्छाशक्ति की कमी के कारण।
दिलचस्प बात यह रही कि जहां राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत और पीएम मोदी के प्रयासों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की, वहीं उन्होंने पड़ोसी देश चीन पर बेहद तीखे हमले बोले। ट्रंप ने कहा कि चीन दुनिया भर में फेंटानिल और मेथामफेटामाइन जैसी घातक सिंथेटिक ड्रग्स बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर केमिकल्स का सबसे बड़ा उत्पादक बना हुआ है। उन्होंने बीजिंग को चेतावनी देते हुए कहा कि वह इन केमिकल पदार्थों के अवैध प्रवाह को रोकने और तस्करों पर मुकदमा चलाने के लिए सख्त कदम उठाए।
इसके साथ ही, अमेरिका ने उन देशों की एक अलग ब्लैकलिस्ट भी बनाई जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय ड्रग नियंत्रण समझौतों का पालन करने में ‘स्पष्ट विफलता’ (Failed Demonstrably) दिखाई है। इस विफलता वाली श्रेणी में अफगानिस्तान, बोलिविया, म्यांमार और कोलंबिया को रखा गया है। भारत को इस श्रेणी से पूरी तरह बाहर रखा गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि भारत के प्रयासों को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिल रही है।
ट्रंप ने अपने उद्घोषणा पत्र में जोर देकर कहा कि उनकी सरकार नारको-टेररिज्म और ड्रग कार्टेल्स के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई कर रही है। उन्होंने बताया कि सीमा सुरक्षा कड़ी होने से अमेरिका में ड्रग ओवरडोज से होने वाली मौतों में गिरावट आई है और अमेरिकी एजेंसियां वैश्विक स्तर पर ड्रग सिंडिकेट्स के खिलाफ कड़े कदम उठा रही हैं। ऐसे माहौल में भारत के साथ उनका रणनीतिक तालमेल और गहरा हुआ है।
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे में नशीले पदार्थों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई गई है। गृह मंत्रालय और केंद्रीय एजेंसियों ने न केवल देश के भीतर हजारों करोड़ रुपये के मादक पदार्थों को जब्त कर नष्ट किया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी और सहयोगी एजेंसियों के साथ साझा खुफिया अभियानों को भी अंजाम दिया है। अमेरिका द्वारा भारत के प्रयासों की इस सार्वजनिक सराहना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सख्त कानून-प्रवर्तन नीति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
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