केशव मौर्य का कार्य जमीन पर दिखने लगे, बलरामपर में ग्रामीणों का पलायन रूका, अब जी राम जी में कार्य कर सकून से गॉव में कर रहे जीवनयापन

केशव प्रसाद मौर्य के धरातलीय क्रियान्वयन से तराई अंचल में स्थित जनपद बलरामपुर में व्यापक सामाजिक और आर्थिक बदलाव परिलक्षित हो रहा है। कभी रोजगार की खोज में बड़े शहरों और अन्य प्रदेशों की ओर रुख करने वाले ग्रामीणों को अब अपनी ही ग्राम पंचायत में आजीविका की वैधानिक सुरक्षा प्राप्त हो रही है। जिला प्रशासन की सतत निगरानी और पारदर्शी कार्यप्रणाली के चलते जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं।

जनपद बलरामपुर में योजना के आंकड़ों से इसकी जमीनी सफलता स्पष्ट रूप से रेखांकित होती है। जिला प्रशासन द्वारा जिले में अब तक कुल 1,85,238 जॉब कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इनमें से 1,13,454 जॉब कार्ड पूर्ण रूप से सक्रिय श्रेणी में हैं। इन जॉब कार्डों के माध्यम से जनपद भर में 1,23,202 सक्रिय श्रमिक विभिन्न विकासपरक परियोजनाओं से जुड़कर सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।

जनपद बलरामपुर में कार्यरत सक्रिय श्रमिकों में 52,819 महिलाएं सम्मिलित हैं। महिलाओं को घर के निकट नियमित कार्य और पारदर्शी मजदूरी मिलने से न केवल उन गांव के विकास की प्राथमिकताएं स्थानीय खुली बैठकों में ग्रामीणों की सहमति से तय की जाती हैं। इसके अतिरिक्त, कार्यों की सामाजिक उपयोगिता और वित्तीय पारदर्शिता की जांच के लिए ग्राम सभा स्तर पर नियमित सोशल ऑडिट की व्यवस्था को दृढ़ता से लागू किया गया है।के आत्मसम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई है, बल्कि परिवार के पोषण, बच्चों की नियमित शिक्षा और प्राथमिक स्वास्थ्य संबंधी व्यय को पूरा करने में भी वे सक्षम बन रही हैं।