Most Bacteria Prone Chicken Part: चिकन का कौन सा हिस्सा होता है सबसे ज्यादा बैक्टीरिया वाला? 99% चिकन लवर्स को नहीं पता ये कड़वा सच

भारत समेत दुनिया भर में नॉन-वेज खाने के शौकीनों की पहली पसंद चिकन (चिकन करी, रोस्टेड चिकन, बिरयानी या टिक्का) ही होता है। हाई प्रोटीन, कम फैट और लजीज स्वाद के चलते फिटनेस फ्रीक से लेकर आम लोग इसे बड़े चाव से अपनी डाइट में शामिल करते हैं। दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता, हैदराबाद से लेकर मुंबई तक की नॉन-वेज गलियों में शाम ढलते ही चिकन की दुकानों पर भीड़ उमड़ पड़ती है। किंतु स्वाद के इस सफर में 99 प्रतिशत लोग इस वैज्ञानिक तथ्य से पूरी तरह अनजान रहते हैं कि पूरे चिकन के सभी हिस्से बैक्टीरिया के लिहाज से एक जैसे नहीं होते।

कच्चे चिकन में स्वाभाविक रूप से कई खतरनाक रोगाणु पाए जाते हैं। लेकिन पक्षी के शरीर की जैविक बनावट और पाचन तंत्र के चलते उसका एक खास हिस्सा ऐसा होता है, जहां बैक्टीरिया का जमावड़ा सबसे सघन और जानलेवा स्तर पर होता है। यदि इस हिस्से को संभालते और पकाते समय थोड़ी सी भी लापरवाही बरती जाए, तो यह पेट में तीव्र संक्रमण, उल्टी-दस्त और अस्पताल पहुंचाने वाली फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है।

खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों, माइक्रोबायोलॉजिस्ट और वैश्विक स्वास्थ्य संस्थाओं (जैसे US CDC और FSSAI) के शोध के अनुसार, चिकन का सबसे अधिक बैक्टीरिया-युक्त हिस्सा ‘चिकन की त्वचा’ (Chicken Skin) और पक्षी का ‘निचला आंतों से सटा हिस्सा व आंतरिक अंग’ (Gizzards, Intestines & Liver) होता है।

विशेषकर जब पूरे चिकन (Whole Chicken) की बात आती है, तो उसकी त्वचा (Skin) और पीठ व पूंछ के आसपास का हिस्सा (Tail/Parson’s Nose) बैक्टीरिया का सबसे बड़ा अड्डा माना जाता है:

  • स्किन की बनावट: चिकन की त्वचा में असंख्य सूक्ष्म रोमछिद्र (Pores), सिलवटें और फैट की एक चिपचिपी परत होती है। पंख उखाड़े जाने के बाद ये छिद्र खुल जाते हैं, जहां बैक्टीरिया आसानी से चिपक जाते हैं और सामान्य रूप से पानी से धोने पर भी बाहर नहीं निकलते।

  • आंतों से बैक्टीरिया का रिसाव: पोल्ट्री फार्मों और वधशालाओं (Slaughterhouses) में कटाई के दौरान पक्षी की आंतों (Gastrointestinal Tract) में मौजूद मल और पाचक रस अक्सर त्वचा और आंतरिक अंगों (विशेषकर लिवर और पोटे/Gizzard) के संपर्क में आ जाते हैं।

  • पोल्ट्री फार्म का परिवेश: मुर्गियां फार्म में जिस सतह पर बैठती हैं, उस फर्श की गंदगी, विष्ठा और नमी सबसे पहले उनकी त्वचा, जांघों के निचले हिस्से और पंखों के नीचे के संवेदनशील हिस्सों पर चिपकती है।

चिकन की त्वचा और बिना साफ किए गए हिस्सों में मुख्य रूप से दो सबसे घातक बैक्टीरिया पनपते हैं:

  • कैंपाइलोबैक्टर (Campylobacter): यह कच्चे पोल्ट्री मीट में पाया जाने वाला दुनिया का सबसे आम फूड पॉइजनिंग बैक्टीरिया है। यह पेट में गंभीर ऐंठन, खूनी दस्त, तेज बुखार और कई हफ्तों तक रहने वाली कमजोरी पैदा कर सकता है।

  • साल्मोनेला (Salmonella): यह बैक्टीरिया चिकन की आंतों और त्वचा पर बहुतायत में रहता है। यह टाइफाइड जैसे लक्षण, आंतों में अल्सर और डिहाइड्रेशन का कारण बनता है। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में यह जानलेवा तक साबित हो सकता है।

  • ई-कोलाई (E. Coli) और क्लोस्ट्रीडियम (Clostridium): अधपके चिकन या गंदे कटिंग बोर्ड के संपर्क में आने से ये रोगाणु तेजी से पूरे भोजन में फैल जाते हैं।

अधिकांश घरों में यह आम धारणा है कि बाजार से कच्चा चिकन लाकर उसे सिंक में तेज पानी की धार के नीचे रगड़-रगड़ कर धोने से सारे बैक्टीरिया साफ हो जाते हैं। किंतु खाद्य सुरक्षा विज्ञान के अनुसार, यह सबसे खतरनाक अभ्यास है।

  • पानी के छींटों का खतरा: जब आप सिंक के नल के नीचे कच्चे चिकन (विशेषकर त्वचा वाले हिस्से) को धोते हैं, तो पानी की बूंदों के सूक्ष्म कण (Aerosols) 2 से 3 फीट के दायरे में चारों तरफ उड़ते हैं।

  • बर्तनों में बैक्टीरिया का फैलाव: ये पानी के छींटे सिंक के आसपास रखे साफ बर्तनों, कटिंग बोर्ड, चाकू, पीने के पानी और स्लैब पर पड़े कच्चे सलाद पर चिपक जाते हैं। इसे ‘क्रॉस-कंटैमिनेशन’ (Cross-Contamination) कहा जाता है।

  • धोने से चिकन के छिद्रों में घुसे बैक्टीरिया मरते नहीं हैं, बल्कि वे पूरे किचन में फैल जाते हैं। वैज्ञानिक सलाह यही है कि कच्चे चिकन को नल के नीचे धोने के बजाय सीधे साफ चॉपिंग बोर्ड पर रखकर पकाने की तैयारी करनी चाहिए, क्योंकि बैक्टीरिया केवल तेज आंच पर ही मरते हैं।

चिकन का सुरक्षित और पौष्टिक आनंद लेने के लिए इन बुनियादी खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य रूप से करें:

  • स्किनलेस (Skinless) चिकन को प्राथमिकता दें: यदि संभव हो, तो हमेशा चमड़ी उतारा हुआ (Skinless) चिकन ही खरीदें। त्वचा हटाने से 70 से 80 प्रतिशत सतही बैक्टीरिया और अतिरिक्त अनहेल्दी सैचुरेटेड फैट अपने आप अलग हो जाते हैं।

  • आंतरिक अंगों की गहरी सफाई: यदि आप चिकन लिवर (कलेजी) या पोटा (Gizzard) खाना पसंद करते हैं, तो इन्हें पकाने से पहले गुनगुने पानी और सिरके/नींबू के घोल से अलग से पूरी तरह साफ करें और सुनिश्चित करें कि इनमें कोई अपशिष्ट न बचा हो।

  • 75°C का आंतरिक तापमान: बैक्टीरिया केवल उच्च तापमान पर ही नष्ट होते हैं। चिकन को तब तक अच्छी तरह पकाएं जब तक कि उसके भीतर का तापमान कम से कम 74°C से 75°C (165°F) तक न पहुंच जाए। अंदर का मांस गुलाबी या चिपचिपा बिल्कुल नहीं दिखना चाहिए।

  • अलग चॉपिंग बोर्ड और चाकू: कच्चे चिकन को काटने के लिए एक अलग प्लास्टिक या स्टील का चॉपिंग बोर्ड इस्तेमाल करें। कभी भी उसी चाकू या बोर्ड से सलाद, फल या हरी सब्जियां न काटें।

  • हाथों की गहरी धुलाई: कच्चे चिकन को छूने के तुरंत बाद अपने हाथों को साबुन और गुनगुने पानी से कम से कम 20 सेकंड तक अच्छी तरह धोएं।