
संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच पर भारत ने एक बार फिर सीमा पार आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क को पनाह देने को लेकर पाकिस्तान को कड़े शब्दों में घेरा है। संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद की बैठकों के दौरान पाकिस्तान द्वारा कश्मीर और अल्पसंख्यकों के बहाने भारत पर अनर्गल आरोप लगाने की कोशिशों का भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने ‘राइट टू रिप्लाई’ (Right of Reply) के तहत करारा जवाब दिया।
भारतीय राजनयिकों ने विश्व पटल पर पाकिस्तान के दशकों पुराने आतंकी गठजोड़ को बेनकाब करते हुए साफ कहा कि जिस देश की पहचान आतंकवाद के वैश्विक केंद्र (Epicenter of Terrorism) के रूप में हो, उसे शांति, लोकतंत्र और मानवाधिकारों पर उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। भारत ने स्पष्ट किया कि दुनिया भूली नहीं है कि 9/11 के सबसे बड़े गुनहगार कहां छिपे हुए पाए गए थे और कौन सा देश आज भी संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों को वित्तीय और सैन्य संबल मुहैया करा रहा है।
भारतीय प्रतिनिधि ने संयुक्त राष्ट्र में भाषण के दौरान दुनिया को झकझोरते हुए याद दिलाया कि 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए 9/11 के भयानक आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड और अल-कायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन सालों तक पाकिस्तान के एबटाबाद में सैन्य छावनी के ठीक बगल में सुरक्षित पनाह लिए बैठा था।
भारत ने कहा कि इतिहास गवाह है कि दुनिया भर में हुए बड़े आतंकी हमलों के तार किसी न किसी रूप में पाकिस्तान से ही जुड़े पाए गए हैं:
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वैश्विक आतंकियों का आश्रय: 9/11 के प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल खालिद शेख मोहम्मद, अबू जुबैदा और ओसामा बिन लादेन जैसे दुर्दांत आतंकी पाकिस्तानी सरजमीं पर ही पकड़े गए या मारे गए।
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शहीद का दर्जा देने की मानसिकता: यह वही देश है जिसके शीर्ष नेतृत्व ने अपनी संसद में खड़े होकर वैश्विक आतंकी ओसामा बिन लादेन को ‘शहीद’ कहकर महिमामंडित किया था।
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वैश्विक जांच में खुलासे: दुनिया की तमाम सुरक्षा एजेंसियों और संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति (UN Sanctions Committee) के रिकॉर्ड्स इस बात की पुष्टि करते हैं कि पाकिस्तान आतंकवादियों के लिए सबसे सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है।
भारत ने रेखांकित किया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) द्वारा प्रतिबंधित खूंखार आतंकी संगठन—लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), हिजबुल मुजाहिदीन और हरकत-उल-मुजाहिदीन खुलेआम पाकिस्तानी नियंत्रण वाले क्षेत्रों से संचालित हो रहे हैं।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने जोरदार तरीके से कहा:
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हाफिज सईद और मसूद अजहर पर कार्रवाई का ढोंग: 26/11 मुंबई आतंकी हमले का मुख्य सूत्रधार हाफिज सईद, जकीउर रहमान लखवी और पुलवामा व संसद हमले का गुनहगार मसूद अजहर पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र की निगरानी और संरक्षण में ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे हैं।
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टेरर फाइनेंसिंग और स्टेट पॉलिसी: पाकिस्तान ने आतंकवाद को अपनी विदेश नीति के एक औजार (Instrument of State Policy) के रूप में इस्तेमाल किया है। जब अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता है, तो दिखावटी गिरफ्तारियां और प्रतिबंध लगाए जाते हैं, और दबाव कम होते ही उन्हें रिहा कर दिया जाता है।
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सीमा पार घुसपैठ: भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए लगातार हथियारों, ड्रोन और आतंकियों की घुसपैठ कराने की पाकिस्तानी सेना की साजिशें आज भी बेरोकटोक जारी हैं।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों से अपील की कि वे आतंकवाद के मुद्दे पर ‘अच्छे और बुरे आतंकवाद’ के दोहरे मानदंडों को पूरी तरह खारिज करें। भारत ने दोहराया कि जब तक आतंकी फंडिंग, प्रशिक्षण शिविरों और उन्हें पनाह देने वाले सरकारी ढांचे पर सीधी अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक वैश्विक शांति संभव नहीं है।
भारतीय मिशन ने दो टूक शब्दों में कहा कि पाकिस्तान पहले अपनी सीमाओं के भीतर फल-फूल रहे आतंकी ढांचे को नेस्तनाबूद करे और अपने अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को रोके, उसके बाद ही वह किसी अन्य लोकतांत्रिक देश की ओर उंगली उठाने की जुर्रत करे। भारत की इस दृढ़ और अकाट्य दलील ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया।
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