
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, बिगड़ी हुई जीवनशैली, अत्यधिक तनाव और पैकेज्ड व जंक फूड के बढ़ते चलन ने हमारे हृदय स्वास्थ्य को सबसे बड़े खतरे में डाल दिया है। पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से कम उम्र के युवाओं और फिट दिखने वाले लोगों में अचानक कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक के चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं, उसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। अक्सर लोग यह मान बैठते हैं कि जब तक सीने में कोई तेज दर्द या सांस का गंभीर दौरा न पड़े, तब तक उनका दिल पूरी तरह ठीक काम कर रहा है। हकीकत यह है कि हृदय से जुड़ी कई बीमारियां और आर्टरीज में ब्लॉकेज चुपचाप विकसित होते हैं, जिन्हें मेडिकल भाषा में साइलेंट किलर कहा जाता है। देश के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट और हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि महंगे मेडिकल टेस्ट कराने से पहले भी कुछ ऐसे बुनियादी शारीरिक संकेत और साधारण सेल्फ-असेसमेंट तरीके हैं, जिनसे आप खुद जान सकते हैं कि आपका दिल कितना तंदुरुस्त और मजबूत है।
सुबह सोकर उठने के तुरंत बाद, जब शरीर पूरी तरह शांत अवस्था में हो, उस वक्त नापी गई पल्स को रेस्टिंग हार्ट रेट (Resting Heart Rate) कहते हैं। एक स्वस्थ वयस्क के दिल की धड़कन सामान्य अवस्था में 60 से 100 बीट्स प्रति मिनट (BPM) के बीच होनी चाहिए। यदि आप नियमित व्यायाम या खेलकूद करते हैं, तो आपका रेस्टिंग हार्ट रेट 50 से 60 के बीच भी हो सकता है, जो एक बेहद मजबूत हृदय मांसपेशी का संकेत माना जाता है। लेकिन अगर शांत बैठे रहने पर भी आपकी धड़कनें लगातार 90 या 100 से ऊपर भाग रही हैं, तो इसका अर्थ है कि शरीर के अंगों तक खून पहुंचाने के लिए आपके दिल को अतिरिक्त दबाव झेलना पड़ रहा है, जो हृदय की कार्यक्षमता कमजोर होने का पहला प्राथमिक संकेत हो सकता है।
यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी द्वारा प्रमाणित ‘स्टेयर क्लाइम्ब टेस्ट’ (Stair Climb Test) हृदय स्वास्थ्य को परखने का सबसे आसान और सटीक घरेलू पैमाना माना जाता है। यदि आप बिना रुके, बिना अत्यधिक हांफे या बिना सीने में भारीपन महसूस किए 3 से 4 मंजिल यानी लगभग 60 सीढ़ियां 45 से 60 सेकंड में सामान्य गति से चढ़ लेते हैं, तो यह दर्शाता है कि आपकी कार्डियोवैस्कुलर क्षमता बहुत अच्छी है। इसके विपरीत, यदि महज एक मंजिल चढ़ने में ही आपकी सांस फूलने लगती है, चक्कर आने लगते हैं या दिल की धड़कनें बेकाबू होकर सीने में असहजता पैदा करती हैं, तो यह सीधे तौर पर कमजोर स्टैमिना और हृदय पर अत्यधिक दबाव का स्पष्ट चेतावनी संकेत है।
हार्ट की असली फिटनेस इस बात में नहीं है कि एक्सरसाइज के दौरान आपकी धड़कन कितनी तेज होती है, बल्कि इस बात में है कि रुकने के बाद वह कितनी जल्दी सामान्य होती है। इसे हार्ट रेट रिकवरी (HRR) कहा जाता है। जब आप 10 मिनट की तेज सैर (Brisk Walk) या रनिंग पूरी करते हैं, तो रुकने के ठीक 1 मिनट बाद अपनी पल्स चेक करें। यदि 1 मिनट के भीतर आपकी हृदय गति में कम से कम 12 से 20 बीट्स की गिरावट आ जाती है और आपकी सांस सहज होने लगती है, तो इसका मतलब है कि आपका ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम और हार्ट की रिकवरी क्षमता शानदार स्तर पर काम कर रही है।
हृदय की सेहत की सीधी पड़ताल ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) से होती है। आदर्श ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg के आसपास होना चाहिए। लगातार 130/85 से ऊपर रहने वाला बीपी आर्टरीज की भीतरी दीवारों को सख्त और संकरा बना देता है, जिसे हाइपरटेंशन कहते हैं। यदि आपका ब्लड प्रेशर संतुलित रहता है और शरीर में रक्त संचार दुरुस्त है, तो हाथ-पैर ठंडे नहीं पड़ते और सुन्नता नहीं आती। अच्छा ब्लड फ्लो यह साबित करता है कि दिल पूरे शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों को बिना किसी रुकावट के पंप करने में पूरी तरह सक्षम है।
दिनभर सामान्य कामकाज या कुर्सी पर बैठने के बाद शाम के समय यदि आपके टखनों, पंजों या पिंडलियों में बिना किसी चोट के सूजन (Edema) आ जाती है और उंगली से दबाने पर गड्ढा बन जाता है, तो यह दिल की विफलता (Heart Failure) का शुरुआती लक्षण हो सकता है। जब हृदय रक्त को प्रभावी ढंग से वापस ऊपर की ओर पंप नहीं कर पाता, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण शरीर के निचले अंगों में तरल पदार्थ जमा होने लगता है। यदि आपके पैरों और टखनों में कोई सूजन नहीं रहती और जूते चुभने जैसी स्थिति नहीं बनती, तो यह बताता है कि आपका वैस्कुलर सिस्टम और राइट वेंट्रिकल ठीक से काम कर रहे हैं।
अगर आपको 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लेने के बाद भी सुबह उठते ही भारीपन, सुस्ती और अत्यधिक शारीरिक थकान महसूस होती है, तो यह कोशिकाओं तक पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त न पहुंचने का संकेत हो सकता है। जब दिल की मांसपेशियां कमजोर होती हैं, तो वह महत्वपूर्ण अंगों जैसे मस्तिष्क और मांसपेशियों तक पूरा खून नहीं पहुंचा पाता, जिससे मरीज को थोड़ी सी चहलकदमी में भी थकावट होने लगती है। यदि आप दिनभर ऊर्जावान महसूस करते हैं और सामान्य काम बिना किसी असामान्य थकान के निपटा लेते हैं, तो आपका दिल अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहा है।
चिकित्सा जगत में कई शोध यह साबित कर चुके हैं कि ओरल हेल्थ और हार्ट हेल्थ के बीच गहरा संबंध होता है। मुंह के हानिकारक बैक्टीरिया और मसूड़ों की सूजन (Periodontitis) खून के रास्ते धमनियों तक पहुंचकर सूजन पैदा कर सकते हैं, जिससे एथेरोस्क्लेरोसिस यानी ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है। मसूड़ों से खून न आना, मुंह का साफ रहना और गहरी सांसें बिना किसी घुटन के ले पाना एक स्वस्थ कार्डियोवैस्कुलर प्रोफाइल का अप्रत्यक्ष लेकिन बेहद अहम पैमाना है।
यदि आप चाहते हैं कि आपका दिल दशकों तक बिना किसी रुकावट के धड़कता रहे, तो रोजाना कम से कम 30 मिनट का मध्यम एरोबिक व्यायाम, जैसे तेज गति से चलना या स्विमिंग जरूर करें। अपने भोजन में अत्यधिक नमक, रिफाइंड तेल, ट्रांस फैट्स और चीनी की मात्रा तुरंत सीमित करें और मौसमी हरी सब्जियों व फलों को प्राथमिकता दें। 30 साल की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार अपना लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल टेस्ट), फास्टिंग ब्लड शुगर और ईसीजी (ECG) अवश्य करवाएं। किसी भी प्रकार के असामान्य सीने के दर्द, जबड़े या बाएं हाथ में जाने वाले दर्द को एसिडिटी मानकर नजरअंदाज करने की भूल कभी न करें।
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