ऑपरेशन सिंदूर से लेकर सफेद सागर तक का पराक्रम और अब राम मंदिर ट्रस्ट की कमान: जानिए कौन हैं एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा

भारतीय वायु सेना के इतिहास में अपनी वीरता, असाधारण नेतृत्व और तकनीकी दक्षता के लिए पहचाने जाने वाले रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अब एक नई और बेहद अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है, जिसके बाद से देश भर में उनकी प्रशासनिक क्षमता और सैन्य पृष्ठभूमि को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। भारतीय वायु सेना में तीन दशक से अधिक समय तक देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जितेंद्र मिश्रा ने अपने करियर के दौरान कई ऐसे जोखिम भरे और संवेदनशील ऑपरेशनों का नेतृत्व किया है जिन्होंने देश का मान बढ़ाया है। राफेल, सुखोई और अन्य आधुनिक तकनीकी दौर के बीच उनका यह सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं है। अब अयोध्या में राम मंदिर के भव्य प्रबंधन, प्रशासनिक पारदर्शिता और वित्तीय मामलों की देखरेख की जिम्मेदारी एक ऐसे व्यक्ति के हाथों में आई है जिसका अनुशासन और कार्यकुशलता बेजोड़ रही है। इस नियुक्ति से न केवल मंदिर के प्रबंधन में पेशेवर रुख आएगा, बल्कि भविष्य की योजनाओं को भी एक मजबूत दिशा मिलेगी।

जितेंद्र मिश्रा का सैन्य सफर किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं है। वह 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना में एक फाइटर पायलट के रूप में शामिल हुए थे और अपनी मेहनत तथा काबिलियत के दम पर इस मुकाम पर पहुंचे। वह एक कुशल फाइटर कॉम्बैट लीडर होने के साथ-साथ एक अनुभवी एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट भी रहे हैं। उन्होंने अपनी उच्च सैन्य और रणनीतिक शिक्षा देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से प्राप्त की है, जिनमें पुणे स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी, बेंगलुरु का एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, अमेरिका का एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और यूके का रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज शामिल हैं। भारतीय वायु सेना में अपने 39 साल से अधिक लंबे और बेदाग करियर के दौरान उनके पास 3,000 घंटे से ज्यादा की उड़ान भरने का अनूठा अनुभव रहा है। अपने सेवाकाल में उन्होंने फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर से लेकर एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट (ASTE) में चीफ टेस्ट पायलट और दो फ्रंटलाइन एयर बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग जैसे महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया। 30 अप्रैल 2026 को वे एयर मार्शल के पद से सेवानिवृत्त हुए और अब वे राष्ट्र सेवा के एक नए अध्याय की शुरुआत करने जा रहे हैं।

अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने कई महत्वपूर्ण सामरिक ऑपरेशनों में अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया है। चाहे वह पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों के खिलाफ चलाया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हो या फिर वायु सेना के अन्य चुनौतीपूर्ण अभियान, हर जगह उनकी रणनीति सटीक साबित हुई। जनवरी 2025 में उन्होंने भारतीय वायु सेना के सबसे अहम ऑपरेशनल कमांड्स में से एक माने जाने वाले वेस्टर्न एयर कमांड का प्रभार संभाला था। एयर हेडक्वार्टर में डायरेक्टर (ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप) और इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ के रूप में उनकी भूमिका बेहद सराहनीय रही है। देश की सुरक्षा में उनके इन अतुलनीय योगदानों और असाधारण सेवाओं के लिए उन्हें देश के प्रतिष्ठित ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ और ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी यही रणनीतिक सोच और संकट के समय कड़े फैसले लेने की क्षमता अब राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती प्रदान करने में पूरी तरह सहायक साबित होगी।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा के अनुसार, मंदिर के कामकाज में उच्च स्तर की पेशेवर पारदर्शिता, सुशासन और आधुनिक प्रबंधन प्रणालियों को लाने के लिए एक पूर्णकालिक और सक्षम CEO का होना बेहद जरूरी था। जितेंद्र मिश्रा ट्रस्ट के अंतर्गत बिना किसी बाहरी सरकारी दखल के पूरी स्वायत्तता के साथ काम करेंगे और सीधे जनरल सेक्रेटरी को रिपोर्ट करेंगे। वह मंदिर के सभी कानूनी, प्रशासनिक और वित्तीय मामलों के लिए सर्वोच्च कार्यकारी अधिकारी के रूप में जवाबदेह होंगे और संगठन की प्रकृति के अनुसार लंबी अवधि की योजनाएं विकसित करेंगे। इस पद के लिए चयन प्रक्रिया काफी लंबी और पारदर्शी रही थी, जिसकी शुरुआत 6 जुलाई को हुई थी। एक उच्च स्तरीय सिलेक्शन कमेटी ने कुल 5,585 आवेदनों की गहन स्क्रीनिंग के बाद 111 उम्मीदवारों को ऑनलाइन इंटरव्यू के लिए शॉर्टलिस्ट किया और अंत में 16 बेहतरीन उम्मीदवारों को अयोध्या में आमने-सामने के इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। इसके बाद चयन पैनल ने अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट के चेयरमैन महंत नृत्य गोपाल दास महाराज को सौंपी, जिसके बाद एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के रूप में इस प्रतिष्ठित पद पर मुहर लगी।