Strait of Hormuz Crisis: एक्शन मोड में ईरान! स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले 11 और जहाजों पर लगाया कड़ा बैन, ब्लैकलिस्ट जहाजों की संख्या बढ़कर हुई 56; वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य संघर्ष और वाशिंगटन-तेहरान के बीच जारी तल्खी के बीच ईरान ने दुनिया की सबसे संवेदनशील समुद्री तेल आपूर्ति लाइफलाइन ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) पर अपनी पकड़ और सख्त कर ली है। ईरानी समुद्री प्रशासन ने नेविगेशन नियमों और सुरक्षा दिशानिर्देशों के कथित उल्लंघन (Non-Compliance) का हवाला देते हुए अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले 11 और जहाजों को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट कर दिया है।

एक सप्ताह पहले ही तेहरान ने 45 तेल टैंकरों पर प्रतिबंध लगाया था। अब 11 नए जहाजों के जुड़ने से ईरान द्वारा प्रतिबंधित किए गए जहाजों की कुल संख्या बढ़कर 56 तक पहुंच गई है। वैश्विक कच्चे तेल (Crude Oil) के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से की आवाजाही इसी संकरे समुद्री मार्ग से होती है, ऐसे में ईरान के इस आक्रामक कदम ने वैश्विक शिपिंग कंपनियों, तेल व्यापारियों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में खलबली मचा दी है।

ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के आवागमन की निगरानी और नियंत्रण के लिए गठित पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर इस प्रतिबंध की औपचारिक घोषणा की है:

  • बैन का कारण: पीजीएसए के मुताबिक, इन 11 जहाजों ने क्षेत्रीय जलमार्ग से गुजरते समय ईरानी समुद्री प्राधिकरण द्वारा तय किए गए सुरक्षा, ट्रांसपोंडर और नेविगेशन प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया।

  • सहयोग करने वालों पर भी गिरेगी गाज: ईरान ने दो टूक चेतावनी जारी की है कि यदि कोई अन्य मालवाहक या सहायता पोत इन ब्लैकलिस्टेड जहाजों को ईंधन भरने (Bunkering), कार्गो ट्रांसफर या अन्य किसी परिचालन में सहायता करता पाया गया, तो उसे भी तत्काल इस ब्लैकलिस्ट में डाल दिया जाएगा।

  • हटने की कानूनी प्रक्रिया: प्राधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी पोत को इस सूची से बाहर निकलना है, तो उसे औपचारिक कानूनी आवेदन दाखिल करना होगा और नियमों के उल्लंघन न होने के पुख्ता प्रमाण देने होंगे।

ईरान की इस सख्त नाकेबंदी और स्क्रूटनी का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक शिपिंग पर पड़ रहा है:

  • वैकल्पिक रास्तों की तलाश: अंतरराष्ट्रीय शिपिंग ऑपरेटर अब होर्मुज से गुजरने वाले अपने रूटों का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं। कई कंपनियां जहाजों को रोकने या लंबी दूरी के रास्तों को चुनने पर विचार कर रही हैं।

  • समुद्री बीमा (War Risk Insurance) में उछाल: फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में जहाजों पर बढ़ते खतरे और कानूनी जब्ती की आशंका के चलते मैरीटाइम इंश्योरेंस कंपनियों ने ‘वॉर रिस्क प्रीमियम’ में भारी इजाफा कर दिया है, जिससे माल ढुलाई (Freight Cost) का खर्च कई गुना बढ़ गया है।

  • सप्लाई चेन में देरी: टैंकरों की सख्त जांच और प्रतिबंधों के चलते खाड़ी देशों से एशियाई और यूरोपीय बाजारों तक कच्चे तेल व एलएनजी (LNG) की खेप पहुंचने में रुकावटें पैदा हो रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर ईरान की यह सख्ती विशुद्ध रूप से प्रशासनिक नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक जवाबी कार्रवाई का हिस्सा है:

  • हाल के दिनों में अमेरिका ने ईरान पर ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत तेल और शिपिंग क्षेत्र पर नए वित्तीय प्रतिबंध थोपे हैं।

  • जवाब में तेहरान ने अपने भूगोलीय प्रभुत्व का इस्तेमाल करते हुए इस चोकपॉइंट पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है।

  • ईरान के सैन्य अधिकारियों ने पहले भी संकेत दिया है कि यदि पश्चिमी प्रतिबंधों के जरिए उसके वैध तेल निर्यात को पूरी तरह ठप करने की कोशिश की जाएगी, तो वह इस जलमार्ग से किसी अन्य देश के तेल टैंकरों का सुरक्षित पारगमन भी मुश्किल बना देगा।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 56 जहाजों पर प्रतिबंध की यह कार्रवाई दर्शाती है कि मध्य पूर्व का समुद्री मोर्चा अब सीधे आर्थिक और सामरिक जंग में बदल रहा है। यदि यह तनातनी और आगे बढ़ती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।