कड़वी क्यों बन जाती है भगवान कृष्ण को लगने वाली प्रसाद की पंजीरी? शेफ सारिका की ये 3 खास टिप्स अपनाएं

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का पावन पर्व नजदीक आते ही हर घर में कान्हा के स्वागत की तैयारियां जोरों-शोरों पर शुरू हो जाती हैं। बाल गोपाल के भोग के बिना इस त्योहार की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। भोग की थाली में मक्खन-मिश्री, चरणामृत और पंचामृत के साथ-साथ धनिए की पंजीरी का विशेष स्थान होता है, जिसे प्रसाद के रूप में हर घर में बड़े चाव से तैयार किया जाता है। हालांकि कई बार देखने में आता है कि लाख कोशिशों के बावजूद प्रसाद की पंजीरी कड़वी हो जाती है, जिससे पूरा स्वाद और मेहनत खराब हो जाती है। अगर आपके साथ भी अक्सर ऐसा ही होता है, तो अब परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। जानी-मानी फूड एक्सपर्ट और शेफ सारिका ने इस समस्या से निपटने के लिए बेहद आसान और अचूक 3 टिप्स साझा किए हैं, जिन्हें अपनाकर अगर आप पंजीरी बनाएंगे तो वह कभी कड़वी नहीं होगी और उसका स्वाद ऐसा होगा कि भगवान कृष्ण के साथ-साथ आपके घर आने वाले मेहमान भी तारीफ करते नहीं थकेंगे। आइए जानते हैं पंजीरी बनाने की सही विधि और उन खास बातों के बारे में जो इसे परफेक्ट बनाती हैं।

ज्यादातर लोगों को यह लगता है कि पंजीरी सिर्फ धनिया पाउडर को घी में भूनकर और उसमें चीनी मिलाकर तैयार कर ली जाती है, लेकिन यहीं पर सबसे बड़ी गलती हो जाती है। धनिए के बीज या पाउडर में प्राकृतिक रूप से कुछ ऐसे तत्व और तेल होते हैं जो अत्यधिक तापमान या गलत तरीके से भूनने पर अपना स्वाद बदल लेते हैं। जब धनिए को तेज आंच पर या बहुत ज्यादा भून दिया जाता है, तो वह अंदर से जल जाता है जिसकी वजह से प्रसाद में कड़वाहट आ जाती है। इसके अलावा कई बार पुरानी या सीलन वाली धनिया पत्ती या बीज का इस्तेमाल कर लिया जाता है, जो प्रसाद के पूरे स्वाद को कड़वा कर देता है। शेफ सारिका का कहना है कि जन्माष्टमी के इस पवित्र प्रसाद को बनाते समय सामग्री की गुणवत्ता और गैस की आंच पर विशेष नियंत्रण रखना बेहद जरूरी है, तभी मंदिर जैसी सोंधी खुशबू और मिठास वाली पंजीरी बनकर तैयार होती है।

पंजीरी को परफेक्ट और कड़वाहट से मुक्त बनाने के लिए शेफ सारिका की सबसे पहली सलाह यह है कि धनिए को हमेशा धीमी से मध्यम आंच (Low to Medium Flame) पर ही भूनना चाहिए। कड़ाही में शुद्ध देशी घी डालने के बाद जब वह हल्का गर्म हो जाए, तब उसमें धनिया पाउडर या दरदरा पिसा हुआ साबुत धनिया डालें। गैस की फ्लेम को कभी भी तेज न करें, क्योंकि तेज आंच पर धनिया ऊपर से तो भून जाता है लेकिन अंदर से जलकर कड़वा हो जाता है। धनिए को लगातार चलाते हुए तब तक भूनें जब तक कि उससे एक भीनी-भीनी और सोंधी खुशबू न आने लगे और उसका रंग हल्का सुनहरा न हो जाए। इसमें थोड़ा वक्त जरूर लगता है, लेकिन यही वह प्रक्रिया है जो पंजीरी के असली स्वाद को बाहर लाती है। भूनने के बाद इसे तुरंत किसी दूसरी ठंडी प्लेट या बर्तन में निकाल लें, क्योंकि गर्म कड़ाही में छोड़ने पर भी धनिया और अधिक पककर जल सकता है।

पंजीरी को और अधिक स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाने के लिए उसमें मखाने, काजू, बादाम, और गरी का बुरादा मिलाया जाता है, लेकिन इन्हें मिलाने का भी एक निश्चित तरीका होता है। शेफ सारिका की दूसरी टिप यह है कि सभी ड्राई फ्रूट्स को अलग से थोड़े से घी में कुरकुरा होने तक भून लें और फिर उन्हें दरदरा पीसकर या छोटे टुकड़ों में काटकर धनिए में मिलाएं। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कभी भी गरम-गरम भुने हुए धनिए में पिसी हुई चीनी या बूरा न मिलाएं। यदि आप गर्म पंजीरी में चीनी डाल देंगे, तो चीनी पिघल जाएगी और वह चिपचिपी व कड़वी हो सकती है। हमेशा धनिए और मेवों के मिश्रण को पूरी तरह से कमरे के तापमान पर ठंडा हो जाने दें, उसके बाद ही उसमें स्वादानुसार पिसी हुई चीनी या खांड मिलाएं। इन छोटी-छोटी लेकिन बेहद जरूरी बातों का ध्यान रखकर बनाई गई पंजीरी हमेशा स्वादिष्ट, खिली-खिली और खुशबूदार बनती है।

जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर भगवान को भोग लगाने के लिए जो भी चीजें बनाई जाती हैं, उन्हें पूर्ण पवित्रता और साफ-सफाई के साथ तैयार किया जाना चाहिए। पंजीरी बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि तुलसी के कुछ ताजे पत्ते अंत में प्रसाद में जरूर मिलाए जाएं, क्योंकि तुलसी के बिना भगवान श्रीकृष्ण कोई भी भोग स्वीकार नहीं करते हैं। इस बार शेफ सारिका की इन आसान टिप्स को आजमाएं और अपने घर पर ही बिल्कुल बाजार जैसी परफेक्ट और सोंधी धनिए की पंजीरी तैयार करें। आपके द्वारा बनाई गई यह खास पंजीरी न केवल आपके व्रत के प्रसाद को और बेहतर बनाएगी, बल्कि सभी का दिल भी जीत लेगी।