दिल्ली की हवा में घुला जहर, AQI 250 पार होते ही सरकार का नया विंटर एक्शन प्लान लागू; 50% WFH और गाड़ियों पर कड़े प्रतिबंध

सर्दियों की शुरुआत के साथ ही राजधानी दिल्ली और एनसीआर के आसमान पर धुंध और स्मॉग की घनी चादर फैलनी शुरू हो गई है। वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई (AQI) 250 के आंकड़े को पार कर ‘खराब’ से ‘बेहद खराब’ की गंभीर श्रेणी में पहुंच चुका है, जिससे राजधानी के निवासियों को सांस लेने में भारी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है। जहरीली हवा और धूल के बढ़ते गुबार को रोकने के लिए दिल्ली सरकार, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने अपने संशोधित विंटर एक्शन प्लान के तहत आपातकालीन नियमों को तुरंत प्रभाव से लागू करने का फैसला लिया है। प्रदूषण के स्तर को ‘गंभीर’ श्रेणी में जाने से रोकने के लिए वाहनों की आवाजाही, कार्यालयों के कामकाज, औद्योगिक गतिविधियों और निर्माण कार्यों पर कड़े दिशा-निर्देश तय किए गए हैं।

राजधानी में प्रदूषण का एक बड़ा हिस्सा सड़कों पर दौड़ने वाले पुराने वाहनों से निकलता है, जिस पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बाहरी राज्यों से आने वाली गैर-BS-VI गाड़ियों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी है। दिल्ली की सीमाओं पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे सक्रिय कर दिए गए हैं, जो नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान करके तुरंत ऑटोमैटिक ई-चालान जारी कर रहे हैं। इस कड़े नियम के तहत केवल BS-VI मानक वाले वाहन, सीएनजी, इलेक्ट्रिक गाड़ियां और एम्बुलेंस व फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाओं को ही दिल्ली की सीमा में प्रवेश की अनुमति दी गई है। इसके साथ ही पेट्रोल पंपों पर वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) की जांच को अनिवार्य करते हुए ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ अभियान को पूरी सख्ती से जमीन पर उतारा जा रहा है।

सड़कों पर ट्रैफिक जाम को घटाने और पीक ऑवर्स में गाड़ियों से निकलने वाले धुएं के दबाव को कम करने के लिए सरकारी और निजी दफ्तरों के लिए 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम (WFH) की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। दफ्तरों में कर्मचारियों की शारीरिक उपस्थिति को आधा करने के साथ ही कर्मचारियों के आने-जाने के समय में भी फेरबदल (Staggered Timings) किया गया है। नए नियमों के मुताबिक दिल्ली नगर निगम (MCD) के दफ्तर सुबह 8:30 से शाम 5:00 बजे तक काम करेंगे, जबकि दिल्ली सरकार के कार्यालय सुबह 10:00 से शाम 6:30 बजे तक संचालित होंगे। इस व्यवस्था से सुबह और शाम के व्यस्त समय में सड़कों पर एक साथ गाड़ियों की भीड़ नहीं जुटेगी, जिससे गाड़ियों के ठहरने से होने वाले धुएं के उत्सर्जन में भारी गिरावट आएगी।

निजी कारों और दोपहिया वाहनों के अत्यधिक इस्तेमाल को हतोत्साहित करने के लिए सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई है। दिल्ली के सभी अधिकृत पार्किंग स्थलों पर सामान्य पार्किंग दरों को दोगुना करने का निर्देश जारी किया गया है, ताकि लोग निजी गाड़ियां निकालने के बजाय बस और मेट्रो का सहारा लें। हालांकि, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) द्वारा संचालित मेट्रो पार्किंग परिसरों को इस बढ़ोतरी से छूट दी गई है ताकि मेट्रो से आवागमन करने वाले यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े। प्रशासन ने मेट्रो और डीटीसी बसों के फेरों की संख्या में भी बढ़ोतरी की है ताकि आम मुसाफिरों को यात्रा में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

प्रदूषण फैलाने में पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे महीन धूल कणों की भूमिका सबसे घातक मानी जाती है। इसे देखते हुए राजधानी में खुली तोड़फोड़ और बाहरी सिविल निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, सिवाय उन चुनिंदा बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के जो अनिवार्य सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी हैं। इमारतों के भीतर होने वाले प्लंबिंग और इलेक्ट्रिकल जैसे जरूरी कामों को सख्त धूल नियंत्रण मानकों के साथ ही जारी रखने की अनुमति है। सड़कों से उड़ने वाली धूल को दबाने के लिए नगर निगम और पीडब्ल्यूडी की टीमों ने दिन-रात मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनों, मोबाइल वाटर स्प्रिंकलर और एंटी-स्मॉग गनों को प्रमुख चौराहों और प्रदूषण हॉटस्पॉट्स पर तैनात कर दिया है।

खुले में पत्तियां, कूड़ा-कचरा और प्लास्टिक या बायोमास जलाने पर प्रशासन ने जीरो टॉलरेंस की नीति लागू की है। खुले में आग जलाने वालों पर भारी आर्थिक जुर्माना और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। इन सभी पाबंदियों की वास्तविक निगरानी के लिए सरकार ने एक एकीकृत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) युक्त कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया है। यह हाई-टेक कंट्रोल रूम पूरे शहर के सीसीटीवी कैमरों, एंटी-स्मॉग गन के संचालन और निर्माण स्थलों की लाइव मॉनिटरिंग कर रहा है ताकि किसी भी इलाके में नियमों की अनदेखी होते ही उड़नदस्ते मौके पर पहुंचकर तुरंत कार्रवाई कर सकें।