नेतन्याहू को हटाने के लिए आइजेनकॉट की 4 शर्तें

इजरायल के सत्ता के गलियारों में इस समय एक बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है, जहां प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक कुर्सी पर अब तक का सबसे बड़ा संकट मंडरा रहा है। देश की मुख्य विपक्षी लहर का नेतृत्व कर रहे पूर्व IDF चीफ ऑफ स्टाफ और नेशनल यूनिटी पार्टी के वरिष्ठ नेता गडी आइजनकोट (Gadi Eisenkot) ने नेतन्याहू को हटाकर एक नई वैकल्पिक सरकार बनाने के लिए अपनी 4 बड़ी और कड़ी शर्तें सामने रख दी हैं। आइजनकोट का यह अल्टीमेटम न केवल इजरायल की घरेलू राजनीति को झकझोर रहा है, बल्कि हमास, गाजा युद्ध और इजरायल की अंतरराष्ट्रीय नीतियों को लेकर भी नए सवाल खड़े कर रहा है।

इजरायल में महीनों से जारी राजनीतिक गतिरोध और गाजा संघर्ष से जुड़ी सरकारी नीतियों से असंतुष्ट विपक्षी दल अब एकजुट होकर बेंजामिन नेतन्याहू को पीएम पद से हटाने की अंतिम तैयारी में जुट गए हैं। गडी आइजनकोट ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल सत्ता परिवर्तन के लिए ही नहीं, बल्कि देश के रणनीतिक और लोकतांत्रिक भविष्य को बचाने के लिए नई सरकार का हिस्सा बनने को तैयार हैं। उन्होंने संसद (Knesset) के भीतर एक नया बहुमत जुटाने का प्रयास तेज कर दिया है, ताकि नेतन्याहू के सुदूर-दक्षिणपंथी (Far-Right) सहयोगियों पर टिकी सरकार को उखाड़ फेंका जा सके।

गडी आइजनकोट द्वारा रखी गई 4 शर्तें इजरायल के भविष्य की विदेश नीति और सुरक्षा रणनीति को पूरी तरह बदलने का दम रखती हैं:

  1. नेतन्याहू का तुरंत इस्तीफा और नेतृत्व परिवर्तन: नई राष्ट्रीय सरकार के गठन की पहली अनिवार्य शर्त बेंजामिन नेतन्याहू का पद छोड़ना है। आइजनकोट का मानना है कि नेतन्याहू के रहते देश में राजनीतिक स्थिरता और पारदर्शी फैसले संभव नहीं हैं।

  2. हमास के खिलाफ सैन्य अभियानों का पुनर्गठन और बंधकों की तुरंत वापसी: दूसरी शर्त के तहत गाजा में हमास के सैन्य और शासन ढांचे को खत्म करने के साथ-साथ इजरायली बंधकों को वापस लाने के लिए नई व्यावहारिक कूटनीति अपनाना शामिल है।

  3. यहूदी और लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में इजरायल की सुरक्षा: तीसरी शर्त इजरायल के यहूदी और लोकतांत्रिक चरित्र की रक्षा करने तथा न्यायिक प्रणाली में संतुलन स्थापित करने से जुड़ी है, ताकि देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत बनी रहें।

  4. क्षेत्रीय शांति और सऊदी अरब के साथ संबंधों का सामान्यीकरण: चौथी बड़ी शर्त के रूप में आइजनकोट ने कहा कि नई सरकार को मध्य पूर्व में अब्राहम समझौते का विस्तार करते हुए सऊदी अरब के साथ आधिकारिक संबंध स्थापित करने और दो-राष्ट्र समाधान के व्यावहारिक पहलुओं पर वैश्विक साझेदारों से बात करने के लिए तैयार रहना होगा।

आइजनकोट की इन शर्तों के सार्वजनिक होते ही नेतन्याहू की लिकुड पार्टी (Likud Party) और उनके कट्टरपंथी दक्षिणपंथी सहयोगियों में हड़कंप मच गया है। नेतन्याहू के समर्थकों ने आइजनकोट पर युद्ध के समय में देश को विभाजित करने का आरोप लगाया है, जबकि दूसरी ओर इजरायल की आम जनता का एक बड़ा हिस्सा, जो लंबे समय से युद्ध विराम और बंधकों की वापसी की मांग कर रहा है, इस पहल का समर्थन करता दिख रहा है।

यदि गडी आइजनकोट विपक्ष के अन्य प्रमुख नेताओं जैसे यायर लैपिड (Yair Lapid) और बेनी गैंट्ज़ (Benny Gantz) के साथ-साथ असंतुष्ट दक्षिणपंथी सांसदों को एक मंच पर लाने में कामयाब हो जाते हैं, तो इजरायली संसद में नेतन्याहू का बहुमत ध्वस्त हो सकता है। यह स्थिति इजरायल को या तो एक नई राष्ट्रीय एकता सरकार (National Unity Government) की ओर ले जाएगी या फिर देश में समय से पहले आम चुनावों का बिगुल बज जाएगा।