
देश भर में सक्रिय मानसूनी हवाओं और गहरे निम्न दबाव के क्षेत्र (Low-Pressure System) के चलते मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कल यानी 4 सितंबर 2026 को मध्य भारत से लेकर उत्तर और पूर्वोत्तर के 25 से अधिक राज्यों में व्यापक वर्षा, गरज-चमक और तेज हवाओं की कड़ी चेतावनी जारी की है। बंगाल की खाड़ी से उठी मानसूनी हलचल और उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश से सटे इलाकों में बने चक्रवाती तंत्र के कारण अगले 24 घंटों के दौरान कई हिस्सों में बारिश का दौर नहीं थमेगा। कई इलाकों में 40 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका को देखते हुए नागरिकों को अत्यधिक सतर्क रहने की हिदायत दी गई है।
मध्य प्रदेश में मानसूनी सिस्टम इस समय अपने चरम पर है। आईएमडी के ताजा बुलेटिन के अनुसार, उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और दक्षिणी उत्तर प्रदेश की सीमा पर बना वेल-मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया अब पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से 4 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश के रीवा, सागर, जबलपुर, शहडोल और आसपास के इलाकों में अति भारी से अत्यंत भारी बारिश (Extremely Heavy Rainfall) का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश के भोपाल, उज्जैन, इंदौर, नर्मदापुरम, ग्वालियर और चंबल संभाग में मूसलाधार बारिश की संभावना बनी हुई है। लगातार हो रही बारिश से नदी-नालों में उफान आ गया है और कई प्रमुख बांधों के गेट खोले जाने की स्थिति बन रही है। निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय बाढ़ का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और उससे सटे नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम व फरीदाबाद में 4 सितंबर को दिनभर बादलों का डेरा रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में रुक-रुक कर गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जाएगी। इस दौरान 15 से 25 किमी प्रति घंटे की गति से हवाएं चलेंगी। बारिश के चलते तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आएगी, जहां अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। हालांकि, बारिश से लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन सुबह और शाम के व्यस्त समय में सड़कों पर जलभराव के चलते यातायात प्रभावित होने की पूरी संभावना है।
उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में 4 सितंबर को झमाझम बारिश का दौर जारी रहेगा। मध्य प्रदेश से सटे बुंदेलखंड और दक्षिणी यूपी के जिलों जैसे झांसी, ललितपुर, बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर और प्रयागराज में बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मुरादाबाद और सहारनपुर में मध्यम से तेज बारिश होगी। राजधानी लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर और अयोध्या समेत पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में भी बादलों की गड़गड़ाहट के साथ मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान है। मौसम विज्ञानियों ने चेतावनी दी है कि पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जलग्रहण क्षेत्रों में फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) जैसी स्थिति बन सकती है।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों में मानसूनी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। उत्तराखंड के देहरादून, नैनीताल, चंपावत, बागेश्वर, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल और पिथौरागढ़ में 4 सितंबर को भीषण बारिश को लेकर चेतावनी दी गई है। पहाड़ों में लगातार हो रही बारिश से भूस्खलन (Landslide) और चट्टानें खिसकने का गंभीर खतरा बना हुआ है, जिससे चारधाम यात्रा मार्गों और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात बाधित हो सकता है। हिमाचल प्रदेश के शिमला, कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों में भी मध्यम से भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। पर्यटकों और स्थानीय लोगों को नदी-नालों और संवेदनशील पहाड़ी ढलानों से दूर रहने की सख्त सलाह दी गई है।
मानसून की अक्षीय रेखा (Monsoon Trough) सक्रिय रहने से बिहार और झारखंड में भी बारिश की गतिविधियां तेज रहेंगी। बिहार के पटना, गया, भागलपुर, रोहतास और कैमूर में तेज हवाओं और बिजली गिरने की संभावना के साथ मध्यम बारिश का अनुमान है। झारखंड के पलामू, गढ़वा और लातेहार में भारी बारिश के चलते प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। दूसरी ओर, राजस्थान के पूर्वी हिस्सों जैसे कोटा, उदयपुर, जयपुर, दौसा और भरतपुर संभाग में भी 4 सितंबर को हल्की से मध्यम और कहीं-कहीं भारी बारिश होने की संभावना है।
खराब मौसम और आकाशीय बिजली के खतरे को देखते हुए मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आंधी-तूफान के समय किसी भी हाल में पेड़ों या जर्जर मकानों के नीचे शरण न लें। खुले मैदानों, जलभराव वाले क्षेत्रों और बिजली के खंभों व ट्रांसफार्मरों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। गरज-चमक के समय घरों में मौजूद टीवी, फ्रिज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्लग बिजली के बोर्ड से निकाल दें। किसान भाइयों को सलाह दी गई है कि वे मौसम सामान्य होने तक खेतों में खुले स्थानों पर न जाएं और अपनी फसलों को जलभराव से बचाने के लिए जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करें। वाहन चालकों को गीली सड़कों पर सावधानीपूर्वक धीमी गति से चलने की सलाह दी गई है।
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