कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा ‘माता सीता का किरदार भगवान राम से भी महान’, महिलाओं से लीडरशिप संभालने की अपील

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने महिलाओं की शक्ति, उनके त्याग और नेतृत्व क्षमताओं को लेकर एक ऐसा बयान दिया है जिसने राजनीतिक गलियारों से लेकर सामाजिक स्तर पर एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने रामायण के पात्रों का जिक्र करते हुए माता सीता के किरदार को भगवान राम से भी अधिक महान बताया। इस बयान के जरिए उन्होंने भारतीय समाज और इतिहास में महिलाओं के अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया है, साथ ही यह संदेश भी दिया है कि आधुनिक दौर में महिलाओं को हर क्षेत्र में नेतृत्व की मुख्यधारा में आना चाहिए। वर्तमान समय में जब देश और राज्य स्तर पर महिला सशक्तिकरण को लेकर तमाम योजनाएं चल रही हैं, तब एक वरिष्ठ राजनेता द्वारा इस तरह की बातें कहना महिलाओं के सामाजिक दर्जे को और मजबूत करता है। कर्नाटक सरकार लगातार महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के लिए कई कल्याणकारी कदम उठा रही है, और इस कार्यक्रम के माध्यम से सरकार की उन नीतियों और प्राथमिकताओं को भी जनता के सामने मजबूती से रखा गया।

बेंगलुरु में ‘उबंटू कंसोर्टियम ऑफ वुमन एंटरप्रेन्योरशिप एसोसिएशन’ के ‘टुगेदर वी ग्रो-इंटरनेशनल वुमन एंटरप्रेन्योरशिप डे’ के पांचवें संस्करण का उद्घाटन करने पहुंचे डी.के. शिवकुमार ने अपने संबोधन में महिलाओं के संघर्ष और उनकी सहनशक्ति की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि जो महिलाएं तमाम विपरीत परिस्थितियों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद अपने दम पर कारोबार खड़ा करती हैं, वे समाज के लिए किसी रोल मॉडल से कम नहीं हैं। रामायण का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि माता सीता का जीवन त्याग, संघर्ष और धैर्य का एक ऐसा प्रतीक है जो हर किसी को प्रेरित करता है। उनका मानना है कि माता सीता का किरदार भगवान राम से भी कहीं ज्यादा महान और प्रेरणादायक है, क्योंकि उन्होंने हर कदम पर अनगिनत परीक्षाओं का सामना करते हुए अद्वितीय सहनशक्ति का परिचय दिया। आज की महिलाएं भी अपने पारिवारिक और व्यावसायिक जीवन में उसी दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रही हैं, इसलिए उनकी इस शक्ति को पहचानना और उनका सम्मान करना बेहद जरूरी है।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को केवल घरों तक सीमित न रहने की सलाह दी, बल्कि उन्हें राजनीति, प्रशासन और व्यापारिक जगत में बढ़-चढ़कर नेतृत्व करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाओं को ग्राम पंचायत के स्थानीय स्तर से लेकर देश की संसद तक हर जगह लीडरशिप की भूमिकाओं में आगे आना चाहिए। शासन और प्रशासन के हर स्तर पर महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना एक प्रगतिशील समाज की कल्पना नहीं की जा सकती है। जब महिलाओं की रचनात्मकता, उनकी अंतर्निहित क्षमता और उनके दृढ़ संकल्प को सही मायनों में पूंजी, आधुनिक तकनीक और बाजार तक पहुंच का मजबूत साथ मिलता है, तो उनके द्वारा रचे जाने वाले विकास की कोई सीमा नहीं रह जाती। सरकार और समाज की यह संयुक्त जिम्मेदारी है कि वे एक ऐसा अनुकूल और सुरक्षित माहौल तैयार करें, जिसमें महिलाओं की छिपी हुई प्रतिभा का पूर्ण विकास हो सके और वे देश के आर्थिक विकास में एक बराबरी की साझीदार बन सकें।

महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाने के लिए कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा चलाई जा रही पांच प्रमुख गारंटी योजनाओं का जिक्र करते हुए डी.के. शिवकुमार ने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि ‘शक्ति योजना’ के तहत राज्यभर की महिलाएं सरकारी बसों में पूरी तरह से मुफ्त यात्रा कर रही हैं, जिससे उनके आवागमन में सुगमता आई है और उनके आत्मविश्वास तथा आत्मनिर्भरता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इसके अलावा, ‘गृह लक्ष्मी योजना’ के माध्यम से कर्नाटक की करीब 1.22 करोड़ महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने सीधे 2,000 रुपये की आर्थिक सहायता पहुंचाई जा रही है, जिससे उन्हें अपने परिवार के भरण-पोषण और छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा करने में भारी मदद मिल रही है। इन योजनाओं के अलावा ‘गृह ज्योति’, ‘अन्न भाग्य’ और ‘युवा निधि’ जैसी कल्याणकारी योजनाएं भी समाज के विभिन्न वर्गों को मजबूत कर रही हैं। इन तमाम पहलों का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक मोर्चे पर सशक्त बनाना है ताकि वे किसी भी परिस्थिति में पीछे न रहें और अपने दम पर एक उज्जवल भविष्य का निर्माण कर सकें।