
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के राजनीतिक केंद्र सहारनपुर पहुंचे समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश की जनता महंगाई, बेरोजगारी, सड़कों के गड्ढों और बदहाल कानून व्यवस्था से त्रस्त हो चुकी है और 2027 में पूर्ण बहुमत के साथ समाजवादी पार्टी की सरकार बनना तय है। इस दौरान पश्चिमी यूपी की लाइफलाइन माने जाने वाले गन्ना किसानों को साधते हुए अखिलेश यादव ने बड़ा सियासी दांव चला और सरकार बनने पर मिलों द्वारा गन्ना खरीद के 24 से 48 घंटे के भीतर सीधे किसानों के खाते में भुगतान सुनिश्चित करने का वादा किया।
सहारनपुर में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय चौधरी यशपाल सिंह के आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने गन्ना किसानों की बदहाली का मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
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सपा प्रमुख ने कहा कि वर्तमान सरकार में महीनों तक गन्ना किसानों को अपनी ही फसल के बकाये के लिए मिलों और दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
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2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही ऐसी ठोस पारदर्शी व्यवस्था और फंड बनाया जाएगा, जिससे पर्ची कटते ही अधिकतम 24 घंटे के भीतर किसान के बैंक खाते में गन्ने का भुगतान पहुंच जाएगा।
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किसानों को उत्तम गुणवत्ता के उन्नत बीज, रियायती दरों पर कीटनाशक, आधुनिक प्रशिक्षण और उपज की सही कीमत दी जाएगी ताकि खेती घाटे का सौदा न बने।
त्योहारी सीजन से ठीक पहले बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों और एथेनॉल उत्पादन को लेकर अखिलेश यादव ने सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए:
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उन्होंने आरोप लगाया कि त्योहार आते ही चीनी के दाम आसमान छूने लगते हैं, जिसका सीधा फायदा सत्ता के करीबी बड़े उद्योगपतियों की जेब में जा रहा है।
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गन्ने से बड़े पैमाने पर एथेनॉल बनाया जा रहा है और कंपनियां भारी मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन इस पूरी वैल्यू चेन में जिस किसान ने दिन-रात पसीना बहाकर गन्ना उगाया, उसे उचित लाभांश नहीं दिया जा रहा।
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सपा सरकार बनने पर एथेनॉल और चीनी से होने वाली अतिरिक्त कमाई का सीधा लाभ किसानों तक पहुंचाने की नीति बनाई जाएगी।
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक जरूरतें बाकी हिस्सों से अलग हैं, इसलिए सहारनपुर के लिए पार्टी एक समर्पित स्थानीय घोषणापत्र (Local Manifesto) जारी करेगी:
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विश्वप्रसिद्ध वुड कार्विंग (काष्ठ कला) उद्योग: सहारनपुर के पारंपरिक लकड़ी नक्काशी उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए कारीगरों को आधुनिक तकनीक, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और विशेष वित्तीय सब्सिडी दी जाएगी।
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स्वास्थ्य और खेल इंफ्रास्ट्रक्चर: क्षेत्र में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के बढ़ते मामलों को देखते हुए सहारनपुर में एक अत्याधुनिक ‘कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट’ स्थापित करने का वादा किया। इसके साथ ही युवाओं के लिए स्पोर्ट्स सिटी और नए स्टेडियम विकसित किए जाएंगे।
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अग्निवीर योजना का विरोध: अखिलेश ने दोहराया कि सेना में लागू संविदा आधारित अग्निवीर व्यवस्था को खत्म कर पुरानी स्थायी भर्ती प्रक्रिया को बहाल करने की लड़ाई जारी रहेगी।
प्रेस वार्ता के दौरान सपा मुखिया ने आरक्षण और जातिगत जनगणना के मुद्दे पर पार्टी का रुख दोहराते हुए कहा कि आरक्षण था, है और हमेशा रहेगा। उन्होंने कहा कि जब तक जातिगत जनगणना कराकर ‘जिसकी जितनी आबादी, उसका उतना हक’ नहीं दिया जाता, तब तक सामाजिक न्याय अधूरा रहेगा।
इसके साथ ही उन्होंने हाल ही में बारिश के दौरान लखनऊ-कानपुर और गंगा एक्सप्रेसवे पर आई दरारों और धंसने की घटनाओं का हवाला देते हुए सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर दावों पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे के डिजाइन में भारी खामियां हैं और सरकार गड्ढों पर पंखे चलाकर या कालीन बिछाकर अपनी कमियां छिपाने की कोशिश कर रही है।
इस दौरे में अखिलेश यादव ने पश्चिमी यूपी के कद्दावर मुस्लिम और किसान नेताओं को एक मंच पर लाकर सियासी समीकरण साधने का भी साफ संदेश दिया। मौसम की खराबी के कारण हालांकि उनकी प्रस्तावित जनसभा को स्थगित करना पड़ा, लेकिन उन्होंने एलान किया कि चुनावी अभियान के दौरान वह दोबारा सहारनपुर आकर ऐतिहासिक रैली करेंगे।
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