
अचानक दिल की धड़कनें तेज हो जाना, सीने में घुटन महसूस होना, सांस लेने में तकलीफ और माथे पर ठंडा पसीना आना—ये ऐसे लक्षण हैं जो किसी भी व्यक्ति को बुरी तरह डरा देते हैं। आज की तनावभरी जीवनशैली में युवा आबादी में जहां एक ओर पैनिक व एंग्जायटी अटैक (Anxiety/Panic Attack) के मामले तेजी से बढ़े हैं, वहीं दूसरी ओर 30 से 45 वर्ष की आयु वर्ग में हार्ट अटैक (Myocardial Infarction) के मामले भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे हैं।
चूंकि दोनों ही स्थितियों में सामने आने वाले शारीरिक संकेत एक-दूसरे से काफी मिलते-जुलते हैं, इसलिए लोग अक्सर भ्रमित हो जाते हैं। पैनिक अटैक को नजरअंदाज करना जानलेवा नहीं होता, लेकिन हार्ट अटैक के लक्षणों को सिर्फ “गैस या घबराहट” समझकर टाल देना रोगी की जान जोखिम में डाल सकता है।
सीने की तकलीफ किस तरह शुरू हुई और वह शरीर के किन हिस्सों में फैल रही है, इससे दोनों में बड़ा अंतर समझा जा सकता है:
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हार्ट अटैक का दर्द: इसमें आमतौर पर सीने के बीचों-बीच या बाईं तरफ ऐसा महसूस होता है जैसे कोई भारी पत्थर रख दिया गया हो या छाती को जकड़ रहा हो (Crushing/Squeezing Pressure)। यह दर्द स्थिर रहता है और धीरे-धीरे बाईं बांह, कंधे, जबड़े, गर्दन या पीठ के ऊपरी हिस्से की ओर फैलता (Radiate) है।
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एंग्जायटी अटैक का दर्द: पैनिक अटैक में दर्द अक्सर तेज, चुभने वाला (Sharp/Stabbing Pain) होता है। यह सीने के एक छोटे हिस्से तक सीमित रहता है और हिलने-डुलने या सांस खींचने पर घटता-बढ़ता है। यह आमतौर पर बांह या जबड़े की तरफ नहीं फैलता।
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घटना की शुरुआत: हार्ट अटैक ज्यादातर किसी शारीरिक मेहनत (सीढ़ियां चढ़ना, तेज चलना) या अत्यधिक भावनात्मक तनाव के बाद शुरू होता है, हालांकि यह आराम की स्थिति में भी आ सकता है। वहीं, एंग्जायटी अटैक किसी फोबिया, पैनिक ट्रिगर या बिना किसी शारीरिक श्रम के अचानक शांत बैठे-बैठे भी उभर आता है।
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अवधि: एक तीव्र पैनिक अटैक आमतौर पर 10 से 20 मिनट में अपने चरम (Peak) पर पहुंचता है और फिर धीरे-धीरे शांत होने लगता है। इसके विपरीत, हार्ट अटैक से जुड़ा दर्द 15-20 मिनट से अधिक समय तक लगातार बना रहता है, आराम करने या पानी पीने से कम नहीं होता बल्कि समय के साथ और गंभीर होता जाता है।
| लक्षण | एंग्जायटी / पैनिक अटैक | हार्ट अटैक (दिल का दौरा) |
| दर्द का प्रकार | सुई जैसी चुभन, तेज और क्षणिक खिंचाव | सीने में भारी दबाव, घुटन और जकड़न |
| दर्द का फैलाव | सामान्यतः सीने तक ही सीमित रहता है | बायां हाथ, कंधा, गर्दन, जबड़ा और पीठ |
| सांस फूलना | तेज-तेज सांस लेना (हाइपरवेंटिलेशन) | फेफड़ों में हवा न भर पाने जैसा दम घुटना |
| अन्य लक्षण | हाथ-पैरों में झनझनाहट, कांपना, अनियंत्रित भय | ठंडा पसीना, उल्टी/जी मिचलाना, अत्यधिक कमजोरी |
| आराम करने पर असर | ध्यान बंटाने और गहरी सांस से कम हो जाता है | आराम करने या लेटने पर भी दर्द कम नहीं होता |
यदि आपको या आपके किसी परिजन को ऐसे लक्षण महसूस हो रहे हैं और आप निश्चित नहीं हैं कि यह पैनिक अटैक है या हार्ट अटैक, तो इसे हमेशा मेडिकल इमरजेंसी (संभावित हार्ट अटैक) मानकर ही कदम उठाएं:
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तुरंत नजदीकी अस्पताल जाएं: घरेलू नुस्खों (जैसे इनो पीना या तेल मालिश) में समय बर्बाद करने के बजाय तुरंत निकटतम इमरजेंसी सेंटर पहुंचे। पहले 60 मिनट को ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है।
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सॉरबिट्रेट या एस्पिरिन: यदि मरीज पहले से हृदय रोगी है, तो डॉक्टर के पूर्व-निर्देशानुसार सॉरबिट्रेट जीभ के नीचे रखें या पानी के साथ एस्पिरिन (Disprin) चबाने की सलाह दी जाती है।
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ईसीजी (ECG) और ट्रोपोनिन टेस्ट: अस्पताल पहुंचते ही सबसे पहले 12-लीड ईसीजी और Troponin-T/I ब्लड टेस्ट कराया जाता है। यह कुछ ही मिनटों में स्पष्ट कर देता है कि हृदय की मांसपेशियों को कोई नुकसान पहुंचा है या नहीं।
यदि जांच में हृदय पूरी तरह स्वस्थ निकलता है और यह केवल एंग्जायटी अटैक साबित होता है, तो भविष्य में ऐसे दौरों को रोकने के लिए किसी मनोचिकित्सक से परामर्श, ब्रीदिंग एक्सरसाइज और तनाव प्रबंधन पर काम करना चाहिए।
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