
बचपन में कैंसर का नाम सुनते ही हर माता-पिता की चिंता बढ़ जाती है। आमतौर पर कैंसर को वयस्कों की बीमारी माना जाता है, जो अस्वस्थ खान-पान, धूम्रपान या जीवनशैली से जुड़ी होती है। हालांकि, बच्चों में कैंसर होने की प्रक्रिया और इसके कारण वयस्कों से पूरी तरह अलग होते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में समय पर सही लक्षणों की पहचान और तत्काल इलाज शुरू होने से लगभग 80% से अधिक बाल कैंसर पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में कैंसर के मुख्य कारणों, चेतावनी संकेतों और सही समय पर जांच के तरीकों को समझना बेहद जरूरी है।
वयस्कों में होने वाले कैंसर के विपरीत बच्चों में कैंसर खराब लाइफस्टाइल या खान-पान की वजह से नहीं होता। इसके प्रमुख कारण इस प्रकार हैं:
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जेनेटिक और डीएनए म्यूटेशन (DNA Mutations): बच्चों में अधिकांश कैंसर कोशिकाओं के डीएनए में अचानक होने वाले बदलावों (म्यूटेशन) के कारण होते हैं। यह बदलाव कोशिकाओं को अनियंत्रित रूप से बढ़ने और ट्यूमर बनाने के लिए प्रेरित करते हैं।
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आनुवंशिक कारण (Inherited Genetic Conditions): लगभग 5 से 10 प्रतिशत मामलों में यह बीमारी परिवार से विरासत में मिली आनुवंशिक विसंगतियों (जैसे डाउन सिंड्रोम, ली-फ्रामेनी सिंड्रोम) से जुड़ी होती है।
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गर्भावस्था या शुरुआती पर्यावरण जोखिम: कुछ दुर्लभ मामलों में जन्म से पूर्व रेडिएशन का अत्यधिक संपर्क या विशेष टॉक्सिन्स भी इसके कारक बन सकते हैं, हालांकि अधिकांश मामलों में कोई स्पष्ट बाहरी कारण नहीं मिलता।
बच्चों में मुख्य रूप से ऐसे कैंसर होते हैं जो तेजी से विकसित हो रहे ऊतकों को प्रभावित करते हैं:
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ल्यूकेमिया (Leukemia): यह बच्चों में सबसे आम ब्लड कैंसर है, जो बोन मैरो में श्वेत रक्त कोशिकाओं (WBCs) को प्रभावित करता है।
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ब्रेन और सीएनएस ट्यूमर (Brain Tumors): मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में विकसित होने वाले ट्यूमर।
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लिम्फोमा (Lymphoma): लसीका प्रणाली (Lymphatic System) को प्रभावित करने वाला कैंसर।
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न्यूरोब्लास्टोमा (Neuroblastoma): तंत्रिका कोशिकाओं का कैंसर, जो अक्सर एड्रिनल ग्लैंड या पेट में शुरू होता है।
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रेटिनोब्लास्टोमा (Retinoblastoma): आंख की पुतली (रेटिना) का कैंसर, जो 5 साल से छोटे बच्चों में अधिक दिखता है।
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विल्म्स ट्यूमर (Wilms Tumor): बच्चों के गुर्दे (किडनी) में होने वाला ट्यूमर।
बच्चों में कैंसर के लक्षण अक्सर सामान्य बाल बीमारियों (जैसे फ्लू, सामान्य चोट या पेट की खराबी) से मिलते-जुलते होते हैं, जिसके कारण कई बार बीमारी पकड़ में आने में देरी हो जाती है। यदि निम्नलिखित लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) से संपर्क करें:
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अस्पष्ट और लगातार बुखार: बिना किसी स्पष्ट संक्रमण के बार-बार बुखार आना या हफ्तों तक ठीक न होना।
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असामान्य गांठ या सूजन: गर्दन, कांख, पेट, कमर या अंडकोष में बिना दर्द वाली गांठ का उभरना और समय के साथ बढ़ना।
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अत्यधिक थकान और पीलापन: बच्चे का सुस्त रहना, ऊर्जा की भारी कमी और शरीर में खून (हीमोग्लोबिन) की कमी दिखना।
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आसानी से चोट लगना या ब्लीडिंग: बिना किसी बड़ी चोट के त्वचा पर नीले निशान (Bruises) पड़ना या मसूड़ों/नाक से खून बहना।
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हड्डियों और जोड़ों में तेज दर्द: बच्चे का लगातार टांगों या पीठ में दर्द की शिकायत करना, जो रात में अधिक बढ़ जाए या बच्चे को लंगड़ाने पर मजबूर करे।
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आंखों में सफेद चमक: कैमरे की फ्लैश लाइट या रोशनी में बच्चे की पुतली का बिल्ली की आंख जैसा सफेद दिखना या भेंगापन (Strabismus) आना।
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लगातार उल्टी और सिरदर्द: सुबह उठते ही सिरदर्द और बिना पेट खराब हुए लगातार उल्टियां होना (ब्रेन ट्यूमर का संभावित संकेत)।
यदि माता-पिता को बच्चे में कोई भी असामान्य लक्षण लगातार 2 से 3 सप्ताह तक दिखाई दे, तो घरेलू उपचार में समय गंवाने के बजाय तुरंत योग्य डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। प्राथमिक जांचों में कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC), अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे और जरूरत पड़ने पर एमआरआई या बायोप्सी की जाती है।
आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों—जैसे कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी, सर्जरी और इम्यूनोथेरेपी—ने बाल कैंसर के इलाज की सफलता दर को काफी बढ़ा दिया है। बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में कीमोथेरेपी को बेहतर तरीके से सहन कर लेता है और उनके ठीक होने की संभावना अधिक होती है। जागरूकता, समय पर पहचान और बिना देरी किया गया सही इलाज ही बाल कैंसर को हराने का सबसे कारगर उपाय है।
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