
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और मध्य पूर्व (Middle East) के सुलगते भू-राजनीतिक गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक जलमार्गों में गिने जाने वाले ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक बेहद आक्रामक और स्पष्ट बयान दिया है। ईरान के ठिकानों पर हालिया अमेरिकी सैन्य हमलों के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि अब इस अहम तेल मार्ग पर पूरी तरह से संयुक्त राज्य अमेरिका का नियंत्रण स्थापित हो चुका है और वर्तमान परिस्थितियों में तेहरान के साथ किसी भी प्रकार की कूटनीतिक बातचीत में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं बची है। ट्रंप का यह बयान वैश्विक ऊर्जा बाजारों, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिका-ईरान के बीच दशकों से चली आ रही तनातनी में एक नया और खतरनाक मोड़ लेकर आया है। इस हाई-वोल्टेज कूटनीतिक ड्रामे और इसके वैश्विक परिणामों के हर एक पहलू को आइए विस्तार से और गहराई के साथ समझते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप के इस कड़े बयान के मायने और होर्मुज स्ट्रेट की रणनीतिक अहमियत
वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से होर्मुज स्ट्रेट दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण धमनियों में से एक है, क्योंकि दुनिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा कच्चा तेल इसी तंग समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। जब भी मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है, तो सबसे पहले इसी जलमार्ग पर संकट के बादल मंडराने लगते हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने हालिया बयान में जिस तरह से अमेरिका के प्रत्यक्ष नियंत्रण और सैन्य दबदबे का दावा किया है, उसने ईरान के रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है। ट्रंप का यह रुख साफ तौर पर यह दर्शाता है कि वाशिंगटन अब कूटनीति के पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर सीधे शक्ति प्रदर्शन और रणनीतिक चाक-चौबंद व्यवस्था पर भरोसा कर रहा है। ईरान द्वारा पूर्व में इस मार्ग को बंद करने या जहाजरानी को बाधित करने की धमकियों के जवाब में अमेरिकी सेना ने अपनी नौसैनिक उपस्थिति को इतना मजबूत कर लिया है कि अब हर एक कमर्शियल वेसल और ऑयल टैंकर की आवाजाही अमेरिकी सुरक्षा घेरे के तहत हो रही है।
ईरान पर हुए हालिया अमेरिकी हमले और दोनों देशों के बीच गहराता खूनी संघर्ष
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ हफ्तों में सैन्य टकराव उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां से वापसी के रास्ते लगभग बंद नजर आते हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और पेंटागन की रिपोर्टों के आधार पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों और रणनीतिक ठिकानों पर सिलसिलेवार सटीक हवाई हमले (Airstrikes) करने का आदेश दिया। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य तेहरान की सैन्य रीढ़ को तोड़ना और उसकी मिसाइल क्षमताओं को पंगु बनाना था। इसके जवाब में ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं, लेकिन अमेरिकी सैन्य ताकत और अत्याधुनिक डिफेंस सिस्टम के आगे फिलहाल तेहरान की आक्रामक रणनीतियों पर लगाम लगती दिख रही है। ट्रंप प्रशासन का यह कड़ा तेवर यह साबित करता है कि अमेरिका अब ईरान के किसी भी प्रकार के दुस्साहस को सहन करने के मूड में बिल्कुल नहीं है और क्षेत्र में अपनी शर्तों पर सुरक्षा और व्यापारिक मार्ग बहाल रखना चाहता है।
बातचीत के दरवाजों का बंद होना और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता नया खतरा
डोनाल्ड ट्रंप का यह कहना कि “अब हमारी बातचीत में कोई दिलचस्पी नहीं है” इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक संवाद के जरिए समाधान की उम्मीद लगभग समाप्त हो चुकी है। जब दुनिया के दो सबसे बड़े विरोधी पक्ष बिना किसी मध्यस्थता के आमने-सामने आ जाते हैं, तो उसका सीधा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ता है। इस सैन्य और राजनीतिक उथल-पुथल का सबसे बड़ा और तात्कालिक प्रभाव क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों पर पड़ रहा है। कच्चा तेल महंगा होने से भारत समेत दुनिया के तमाम विकासशील देशों में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। इसके अलावा, खाड़ी देशों में रह रहे लाखों प्रवासियों और वैश्विक सप्लाई चेन के प्रभावित होने की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं बढ़ा दी हैं। आने वाला समय मध्य पूर्व के इतिहास का सबसे संवेदनशील दौर साबित हो सकता है, जहां एक छोटी सी चिंगारी भी पूरे महाद्वीप को युद्ध की आग में झोंक सकती है।
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